अथाङ्गराजादवतार्य चक्षु-
र्याहीति जन्यामवदत्कुमारी ।
नासौ न काम्यो न च वेद सम्य-
ग्द्रष्टुं न सा भिन्नरुचिर्हि लोकः ॥
अथाङ्गराजादवतार्य चक्षु-
र्याहीति जन्यामवदत्कुमारी ।
नासौ न काम्यो न च वेद सम्य-
ग्द्रष्टुं न सा भिन्नरुचिर्हि लोकः ॥
र्याहीति जन्यामवदत्कुमारी ।
नासौ न काम्यो न च वेद सम्य-
ग्द्रष्टुं न सा भिन्नरुचिर्हि लोकः ॥
अन्वयः
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अथ कुमारी अङ्गराजात् चक्षुः अवतार्य जन्याम् 'याहि' इति अवदत् । असौ न काम्यः न, सा द्रष्टुं सम्यक् न वेद न, हि लोकः भिन्नरुचिः अस्ति ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति॥ अथ कुमार्यङ्गराजाञ्चक्षुरवतार्य। अपनीयेत्यर्थः। जन्यां मातृसखीम्।
जन्या मातृसखीमुदोः इति विश्वः। सुनन्दां याहि गच्छेत्यवदत्। यातेति जन्यानवदत् इति पाठे-जनीं वधूं वहन्तीति जन्या वधूबन्धवः। तान्यात गच्छतेत्यवदत्। जन्यो वरवधूज्ञातिप्रियतुल्यहिते।ञपि च इति विश्वः। अथवा, -जन्या वधूभृत्याः। भृत्याश्चापि नवोढायाः इति केशवः। संज्ञायां जन्या (अष्टाध्यायी ४.४.८२ ) इति यत्प्रत्ययान्ते निपातः। यदत्राह वृत्तिकारः-जनीं वधूं वहन्तीति जन्या जामातुर्वयस्याः इति। यञ्चामरः-जन्याः स्निग्धा वरस्य ये इति। तत्सर्वमुपलक्षणार्थमित्यविरोधः। न चायमङ्गराजनिषेधो दृश्यदोषान्नापि द्रष्टृदोषादित्याह-नेत्यादिना॥ असावङ्गराजः काम्यः कमनीयो नेति न, किंतु काम्य एवेत्यर्थः। सा कुमारी च सम्यग्द्रष्टुं विवेक्तुं न वेदेति न, वेदेत्यर्थः। लोको जनो भिन्नरुचिर्हि रुचिरमपि किंचित्कस्मैचिन्न रोचते। किं कुर्मो न हीच्छा नियन्तुं शक्यत इति भावः ॥
Summary
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Then, the princess, averting her gaze from the king of Anga, told her bridesmaid, "Let us go." It was not that he was undesirable, nor that she did not know how to judge properly; indeed, people simply have different tastes.
सारांश
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अंगराज को देख कर इंदुमती ने सखी से आगे बढ़ने को कहा। राजा में कोई कमी नहीं थी, किंतु संसार में सबकी रुचि भिन्न होती है; उन्हें वे राजा पसंद नहीं आए।
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | then |
| अङ्गराजात् | अङ्गराज (५.१) | from the king of Anga |
| अवतार्य | अवतार्य (अव√तॄ+णिच्+ल्यप्) | having lowered |
| चक्षुः | चक्षुस् (२.१) | gaze |
| याहि | याहि (√या कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | go |
| इति | इति | thus |
| जन्याम् | जन्या (२.१) | the bridesmaid |
| अवदत् | अवदत् (√वद् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| कुमारी | कुमारी (१.१) | the princess |
| न | न | not |
| असौ | अदस् (१.१) | he |
| न | न | not |
| काम्यः | काम्य (१.१) | desirable |
| न | न | not |
| च | च | and |
| वेद | वेद (√विद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | knows |
| सम्यक् | सम्यच् | properly |
| द्रष्टुम् | द्रष्टुम् (√दृश्+तुमुन्) | to see/judge |
| न | न | not |
| सा | तद् (१.१) | she |
| भिन्नरुचिः | भिन्न–रुचि (१.१) | of different tastes |
| हि | हि | indeed |
| लोकः | लोक (१.१) | people |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | था | ङ्ग | रा | जा | द | व | ता | र्य | च | क्षु |
| र्या | ही | ति | ज | न्या | म | व | द | त्कु | मा | री |
| ना | सौ | न | का | म्यो | न | च | वे | द | स | म्य |
| ग्द्र | ष्टुं | न | सा | भि | न्न | रु | चि | र्हि | लो | कः |
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