अवन्तिनाथोऽयमुदग्रबाहु-
र्विशालवक्षास्तनुवृत्तमध्यः ।
आरोप्य चक्रभ्रममुष्णतेजा-
स्त्वष्ट्रेव यत्नोल्लिखितो विभाति ॥
अवन्तिनाथोऽयमुदग्रबाहु-
र्विशालवक्षास्तनुवृत्तमध्यः ।
आरोप्य चक्रभ्रममुष्णतेजा-
स्त्वष्ट्रेव यत्नोल्लिखितो विभाति ॥
र्विशालवक्षास्तनुवृत्तमध्यः ।
आरोप्य चक्रभ्रममुष्णतेजा-
स्त्वष्ट्रेव यत्नोल्लिखितो विभाति ॥
अन्वयः
AI
अयम् उदग्रबाहुः विशालवक्षाः तनुवृत्तमध्यः उष्णतेजाः अवन्तिनाथः चक्रभ्रमम् आरोप्य यत्नोल्लिखितः त्वष्ट्रा इव विभाति ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अवन्तीति॥ उदग्रबाहुर्दीरघबाहुर्विशालवक्षास्तनुवृत्तमध्यः कृशवर्तुलमध्योऽयं राजाऽवन्तिनाथोऽवन्तिदेशाधीश्वरः। त्वष्ट्रा विश्वकर्मणा। भर्तुस्तेजोवेगमसहमानया दुहित्रा संज्ञादेव्या प्रार्थितेनेति शेषः। चक्रभ्रमं चक्राकारं शस्त्रोत्तेजनयन्त्रम्।
भ्रमोऽम्बुनिर्गमे भ्रान्तौ कुण्डाख्ये शिल्पियन्त्रके इति विश्वः। आरोप्ययत्नेनोल्लिखित उष्णतेजाः सूर्य इव विभाति। अत्र मार्गण्डेयः-विश्वकर्मात्वनुज्ञातः शाकद्वीपे विवस्वता। भ्रममारोप्य तत्तेजः शातनायोपचक्रमे ॥ इति ॥
Summary
AI
"This is the lord of Avanti, with powerful arms, a broad chest, and a slender, round waist. He shines as if he were the sun, carefully shaped by the divine artisan Tvashtri after being placed on a potter's wheel."
सारांश
AI
ये अवंतीनाथ विशाल वक्षस्थल और लंबी भुजाओं वाले हैं। ये इतने सुडौल और कांतिवान हैं मानो स्वयं विश्वकर्मा ने इन्हें खराद पर चढ़ाकर अत्यंत यत्नपूर्वक रूप प्रदान किया हो।
पदच्छेदः
AI
| अवन्तिनाथः | अवन्तिनाथ (१.१) | the lord of Avanti |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| उदग्रबाहुः | उदग्र–बाहु (१.१) | with powerful arms |
| विशालवक्षाः | विशाल–वक्षस् (१.१) | broad-chested |
| तनुवृत्तमध्यः | तनु–वृत्त–मध्य (१.१) | with a slender, round waist |
| आरोप्य | आरोप्य (आ√रुह्+णिच्+ल्यप्) | having been placed on |
| चक्रभ्रमम् | चक्रभ्रम (२.१) | a potter's wheel |
| उष्णतेजाः | उष्णतेजस् (१.१) | of fiery valor (the sun) |
| त्वष्ट्रा | त्वष्टृ (३.१) | by Tvashtri |
| इव | इव | as if |
| यत्नोल्लिखितः | यत्न–उल्लिखित (१.१) | carved with effort |
| विभाति | विभाति (वि√भा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shines |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | व | न्ति | ना | थो | ऽय | मु | द | ग्र | बा | हु |
| र्वि | शा | ल | व | क्षा | स्त | नु | वृ | त्त | म | ध्यः |
| आ | रो | प्य | च | क्र | भ्र | म | मु | ष्ण | ते | जा |
| स्त्व | ष्ट्रे | व | य | त्नो | ल्लि | खि | तो | वि | भा | ति |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.