अस्य प्रयाणेषु समग्रशक्ते-
रग्रेसरैर्वाजिभिरुत्थितानि ।
कुर्वन्ति सामन्तशिखामणीनां
प्रभाप्ररोहास्तमयं रजांसि ॥
अस्य प्रयाणेषु समग्रशक्ते-
रग्रेसरैर्वाजिभिरुत्थितानि ।
कुर्वन्ति सामन्तशिखामणीनां
प्रभाप्ररोहास्तमयं रजांसि ॥
रग्रेसरैर्वाजिभिरुत्थितानि ।
कुर्वन्ति सामन्तशिखामणीनां
प्रभाप्ररोहास्तमयं रजांसि ॥
अन्वयः
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समग्रशक्तेः अस्य प्रयाणेषु अग्रेसरैः वाजिभिः उत्थितानि रजांसि सामन्तशिखामणीनां प्रभाप्ररोहास्तमयं कुर्वन्ति ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अस्येति॥ समग्रशक्तेः शक्तित्रयसंपन्नस्यास्यावन्तिनाथस्य प्रयाणेषु जैत्रयात्रास्वग्रेसरैर्वाजिभिरश्वैरुत्थितानि रजांसि सामन्तानां समन्ताद्भक्तानां राज्ञां ये शिखामणयश्चूडामणयस्तेषां प्रभाप्ररोहास्तमयं तेजोऽङ्कुरनाशं कुर्वन्ति। नासीरैरेवास्य शत्रवः पराजियन्त इति भावः ॥
Summary
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"During the marches of this king of complete power, the clouds of dust raised by his vanguard horses cause the light sprouting from the crest-jewels of his vassal kings to be obscured."
सारांश
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अपनी सेना के साथ प्रयाण करते समय, इन शक्तिशाली राजा के घोड़ों द्वारा उड़ाई गई धूल मार्ग के सामंत राजाओं के मुकुटों में जड़ी मणियों की चमक को भी फीका कर देती है।
पदच्छेदः
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| अस्य | इदम् (६.१) | of him |
| प्रयाणेषु | प्रयाण (७.३) | during his marches |
| समग्रशक्तेः | समग्र–शक्ति (६.१) | of one with full power |
| अग्रेसरैः | अग्रेसर (३.३) | by the ones going in front |
| वाजिभिः | वाजिन् (३.३) | by the horses |
| उत्थितानि | उत्थित (उद्√स्था+क्त, १.३) | raised up |
| कुर्वन्ति | कुर्वन्ति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they cause |
| सामन्तशिखामणीनाम् | सामन्त–शिखामणि (६.३) | of the crest-jewels of the vassal kings |
| प्रभाप्ररोहास्तमयम् | प्रभा–प्ररोह–अस्तमय (२.१) | the setting of the sprouting rays of light |
| रजांसि | रजस् (१.३) | the dust clouds |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्य | प्र | या | णे | षु | स | म | ग्र | श | क्ते |
| र | ग्रे | स | रै | र्वा | जि | भि | रु | त्थि | ता | नि |
| कु | र्व | न्ति | सा | म | न्त | शि | खा | म | णी | नां |
| प्र | भा | प्र | रो | हा | स्त | म | यं | र | जां | सि |
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