तामग्रतस्तामरसान्तराभा-
मनूपराजस्य गुणैरनूनाम् ।
विधाय सृष्टिं ललितां विधातु-
र्जगाद भूयः सुदतीं सुनन्दा ॥
तामग्रतस्तामरसान्तराभा-
मनूपराजस्य गुणैरनूनाम् ।
विधाय सृष्टिं ललितां विधातु-
र्जगाद भूयः सुदतीं सुनन्दा ॥
मनूपराजस्य गुणैरनूनाम् ।
विधाय सृष्टिं ललितां विधातु-
र्जगाद भूयः सुदतीं सुनन्दा ॥
अन्वयः
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सुनन्दा अग्रतः तामरसान्तराभाम् अनूपराजस्य गुणैः अनूनाम् विधातुः ललितां सृष्टिम् विधाय (इव स्थिताम्) तां सुदतीम् भूयः जगाद।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तामिति॥ सुनन्दा तामरसान्तराभां पद्मोदरतुल्यकान्तिम्। कनकगौरीमित्यर्थः। गुणैरनूनाम्। अधिकामित्यर्थः। शोभना दन्ता यस्याः सा सुदती।
वयसि दन्तस्य दतृ (अष्टाध्यायी ५.४.१४१ ) इति दत्रादेशः। उगितश्च (अष्टाध्यायी ४.१.६ ) इति ङीप्। तां प्रकृतां प्रसिद्धां वा विधातुर्ललितां सृष्टम्। मधुरनिर्माणां स्त्रियमित्यर्थः। अनुगता आपो येषु तेऽनूपा नाम देशाः। ऋक्पूरब्धूः पथामानक्षे (अष्टाध्यायी ५.४.७४ ) इत्यप्रत्ययः समासान्तः। ऊदनोर्देशे (अष्टाध्यायी ६.३.९८ ) इत्यूदादेशः। तेषां राज्ञोऽनूपराजस्याग्रतो विधाय व्यवस्थाप्य भूयः पुनर्जगाद ॥
Summary
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Sunanda again spoke to the beautiful-toothed princess (Indumati), who stood before her, radiant like the inside of a lotus, not lacking in the virtues of the king of Anupa, and appearing like a charming creation of the Creator.
सारांश
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तपश्चात सुनंदा ने कमल के समान सुंदर कांति वाली इंदुमती को अनूप देश के राजा के सम्मुख ले जाकर, विधाता की उस अनुपम रचना (राजकुमारी) से पुनः कहना प्रारंभ किया।
पदच्छेदः
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| ताम् | तद् (२.१) | to her |
| अग्रतः | अग्रतः | in front |
| तामरसान्तराभाम् | तामरस–अन्तर–आभा (२.१) | who had the lustre of the inside of a lotus |
| अनूपराजस्य | अनूप–राज (६.१) | of the king of Anupa |
| गुणैः | गुण (३.३) | by virtues |
| अनूनाम् | अनून (२.१) | not deficient |
| विधाय | विधाय (वि√धा+ल्यप्) | having made |
| सृष्टिम् | सृष्टि (२.१) | a creation |
| ललिताम् | ललित (२.१) | charming |
| विधातुः | विधातृ (६.१) | of the Creator |
| जगाद | जगाद (√गद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| भूयः | भूयस् | again |
| सुदतीम् | सुदती (२.१) | to the one with beautiful teeth |
| सुनन्दा | सुनन्दा (१.१) | Sunanda |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | म | ग्र | त | स्ता | म | र | सा | न्त | रा | भा |
| म | नू | प | रा | ज | स्य | गु | णै | र | नू | नाम् |
| वि | धा | य | सृ | ष्टिं | ल | लि | तां | वि | धा | तु |
| र्ज | गा | द | भू | यः | सु | द | तीं | सु | न | न्दा |
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