अकार्यचिन्तासमकालमेव
प्रादुर्भवंश्चापधरः पुरस्तात् ।
अन्तःशरीरेष्वपि यः प्रजानां
प्रत्यादिदेशाविनयं विनेता ॥
अकार्यचिन्तासमकालमेव
प्रादुर्भवंश्चापधरः पुरस्तात् ।
अन्तःशरीरेष्वपि यः प्रजानां
प्रत्यादिदेशाविनयं विनेता ॥
प्रादुर्भवंश्चापधरः पुरस्तात् ।
अन्तःशरीरेष्वपि यः प्रजानां
प्रत्यादिदेशाविनयं विनेता ॥
अन्वयः
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यः विनेता चापधरः (सन्) प्रजानाम् अकार्यचिन्तासमकालम् एव पुरस्तात् प्रादुर्भवन् अन्तःशरीरेषु अपि अविनयम् प्रत्यादिदेश।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अकार्येति॥ विनेता शिक्षको यः कार्तवीर्यः। अकार्यस्यासत्कार्यस्य चिन्तया च
अहं चौर्यादिकं करिष्यामीति बुद्ध्या। समकालमेककालमेव यथा तथा पुरस्तादग्रे चापधरः। अन्तः शरीरेष्वन्तःकरणेषु। शरीरशब्देनेन्द्रियं लक्ष्यते। अविनयमपि प्रत्यादिदेश। मानसापराधमपि निवारयामासेत्यर्थः। अन्ये तु वाक्कायापराधमात्रप्रतिकर्तार इति भावः ॥
Summary
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That disciplinarian (Kartavirya), holding his bow, would appear before his subjects the very moment they merely thought of a misdeed, and thus he eradicated impropriety even from their minds.
सारांश
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प्रजा के मन में किसी भी अनुचित कार्य का विचार आते ही ये हाथ में धनुष लिए साक्षात सामने प्रकट हो जाते थे। इस प्रकार वे प्रजा के मानसिक विकारों को भी नियंत्रित करते थे।
पदच्छेदः
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| अकार्यचिन्तासमकालम् | अकार्य–चिन्ता–समकाल (२.१) | at the very same time as the thought of a misdeed |
| एव | एव | indeed |
| प्रादुर्भवन् | प्रादुर्भवन् (प्रादुस्√भू+शतृ, १.१) | appearing |
| चापधरः | चाप–धर (१.१) | holding a bow |
| पुरस्तात् | पुरस्तात् | in front |
| अन्तःशरीरेषु | अन्तः–शरीर (७.३) | even in the inner bodies (minds) |
| अपि | अपि | even |
| यः | यद् (१.१) | who |
| प्रजानाम् | प्रजा (६.३) | of the subjects |
| प्रत्यादिदेश | प्रत्यादिदेश (प्रति+आ√दिश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | removed |
| अविनयम् | अविनय (२.१) | impropriety |
| विनेता | विनेतृ (१.१) | the disciplinarian |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | का | र्य | चि | न्ता | स | म | का | ल | मे | व |
| प्रा | दु | र्भ | वं | श्चा | प | ध | रः | पु | र | स्तात् |
| अ | न्तः | श | री | रे | ष्व | पि | यः | प्र | जा | नां |
| प्र | त्या | दि | दे | शा | वि | न | यं | वि | ने | ता |
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