आयोधने कृष्णगतिं सहाय-
मवाप्य यः क्षत्रियकालरात्रिम् ।
धारां शितां रामपरश्वघस्य
संभावयत्युत्पलपत्रसाराम् ॥
आयोधने कृष्णगतिं सहाय-
मवाप्य यः क्षत्रियकालरात्रिम् ।
धारां शितां रामपरश्वघस्य
संभावयत्युत्पलपत्रसाराम् ॥
मवाप्य यः क्षत्रियकालरात्रिम् ।
धारां शितां रामपरश्वघस्य
संभावयत्युत्पलपत्रसाराम् ॥
अन्वयः
AI
यः आयोधने कृष्णगतिं सहायम् अवाप्य, क्षत्रियकालरात्रिम् रामपरश्वधस्य शितां धाराम् उत्पलपत्रसाराम् संभावयति।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
आयोधन इति॥ यः प्रतीप आयोधने युद्धे कृष्णगतिं कृष्णवर्त्मानमग्निं सहायमवाप्य क्षत्रियाणां कालरात्रिम्। संहाररात्रिमित्यर्थः। रामपरश्वधस्य जामददग्न्यपरशोः।
द्वयोः कुठारः स्वधितिः परशुश्च परश्वधः इत्यमरः (अमरकोशः २.८.९२ ) । शितां तीक्ष्णां धारां मुखम्। खङ्गादीनां च निशितमुखे धारा प्रकीर्तिताइति विश्वः। उत्पलपत्रस्य सार इव सारो यस्यास्तां तथाभूतां संभावयति मन्यते। एतन्नगरजिगीषयागतान्रिपून्स्वयमेव धक्ष्यामीति भगवता वैश्वानरेण दत्तवरोऽयं राजा दह्यन्ते च तथागताः शत्रव इति भारते (वन.अ.११७)कथानुसंधेया॥
Summary
AI
This king (Pratipa), having secured fire as his ally in battle, treats the sharp edge of Parashurama's axe—which was the night of doom for Kshatriyas—as if it were as fragile as a blue lotus petal.
सारांश
AI
युद्ध में अग्नि के समान तेजस्वी सहायक पाकर, उन्होंने परशुराम के तीखे फरसे की धार को भी कमल की पंखुड़ी के समान कोमल सिद्ध कर दिया।
पदच्छेदः
AI
| आयोधने | आयोधन (७.१) | in battle |
| कृष्णगतिम् | कृष्णगति (२.१) | fire |
| सहायम् | सहाय (२.१) | as an ally |
| अवाप्य | अवाप्य (अव+आ√आप्+ल्यप्) | having obtained |
| यः | यद् (१.१) | who |
| क्षत्रियकालरात्रिम् | क्षत्रिय–कालरात्रि (२.१) | the night of doom for Kshatriyas |
| धाराम् | धारा (२.१) | the edge |
| शिताम् | शित (२.१) | sharp |
| रामपरश्वधस्य | राम–परश्वध (६.१) | of the axe of Parashurama |
| संभावयति | संभावयति (सम्√भू +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | considers |
| उत्पलपत्रसाराम् | उत्पल–पत्र–सारा (२.१) | as having the substance of a blue lotus petal |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | यो | ध | ने | कृ | ष्ण | ग | तिं | स | हा | य |
| म | वा | प्य | यः | क्ष | त्रि | य | का | ल | रा | त्रिम् |
| धा | रां | शि | तां | रा | म | प | र | श्व | घ | स्य |
| सं | भा | व | य | त्यु | त्प | ल | प | त्र | सा | राम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.