तासु श्रिया राजपरम्परासु
प्रभाविशेषोदयदुर्निरीक्ष्यः ।
सहस्रधात्मा व्यरुचद्विभक्तः
पयोमुचां पङ्क्तिषु विद्युतेव ॥
तासु श्रिया राजपरम्परासु
प्रभाविशेषोदयदुर्निरीक्ष्यः ।
सहस्रधात्मा व्यरुचद्विभक्तः
पयोमुचां पङ्क्तिषु विद्युतेव ॥
प्रभाविशेषोदयदुर्निरीक्ष्यः ।
सहस्रधात्मा व्यरुचद्विभक्तः
पयोमुचां पङ्क्तिषु विद्युतेव ॥
अन्वयः
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तासु श्रिया (युक्तासु) राज-परम्परासु, प्रभा-विशेष-उदय-दुर्निरीक्ष्यः आत्मा सहस्रधा विभक्तः (सन्), पयोमुचाम् पङ्क्तिषु विद्युता इव, व्यरुचत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तास्विति॥ तासु राजपरम्परासु श्रिया लक्ष्म्या कार्त्र्या पयोमुचां मेघानां पङ्क्तिषु विद्युतेव सहस्रधा विभक्तः। तरंगेषु तरणिरिव स्वयमेक एव प्रत्येकं संक्रामित इत्यर्थः। प्रभाविशेषस्योदयेनाविर्भावेन दुर्निरीक्ष्यो दुर्दर्शन आत्मा श्रियः स्वरूपं व्यरुचद्व्यद्योतिष्ट।
द्युद्भ्यो लुङि (अष्टाध्यायी १.३.९१ ) इति परस्मैपदम्। द्युतादित्वादङ्प्रत्ययः। तस्मिन्समये प्रत्येकं संक्रांन्तलक्ष्मीकतया तेषां किमपि दुरासदं तेजः प्रादुरासीदित्यर्थः ॥
Summary
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Among those lines of kings endowed with royal splendor, he (Aja), difficult to look at due to his exceptional brilliance, shone forth. His single self, reflected a thousand-fold in them, was like a single flash of lightning appearing divided and multiplied in a row of clouds.
सारांश
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राजाओं की उन पंक्तियों में अज की अद्वितीय आभा इस प्रकार चमक रही थी, जैसे बादलों की घटाओं के बीच बिजली अपनी चमक बिखेरती है।
पदच्छेदः
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| तासु | तद् (७.३) | in those |
| श्रिया | श्री (३.१) | with splendor |
| राजपरम्परासु | राज–परम्परा (७.३) | in the lines of kings |
| प्रभाविशेषोदयदुर्निरीक्ष्यः | प्रभा–विशेष–उदय–दुर्निरीक्ष्य (१.१) | difficult to look at due to the rise of exceptional brilliance |
| सहस्रधा | सहस्रधा | a thousand-fold |
| आत्मा | आत्मन् (१.१) | his self |
| व्यरुचत् | व्यरुचत् (वि√रुच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shone |
| विभक्तः | विभक्त (वि√भज्+क्त, १.१) | divided |
| पयोमुचाम् | पयोमुच् (६.३) | of the clouds |
| पङ्क्तिषु | पङ्क्ति (७.३) | in the rows |
| विद्युता | विद्युत् (३.१) | lightning |
| इव | इव | like |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | सु | श्रि | या | रा | ज | प | र | म्प | रा | सु |
| प्र | भा | वि | शे | षो | द | य | दु | र्नि | री | क्ष्यः |
| स | ह | स्र | धा | त्मा | व्य | रु | च | द्वि | भ | क्तः |
| प | यो | मु | चां | प | ङ्क्ति | षु | वि | द्यु | ते | व |
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