संभाव्य भर्तारममुं युवानं
मृदुप्रवालोत्तरपुष्पशय्ये ।
वृन्दावने चैत्ररथादनूने
निर्विश्यतां सुन्दरि यौवनश्रीः ॥

अन्वयः AI सुन्दरि! अमुं युवानं भर्तारं संभाव्य, चैत्ररथात् अनूने वृन्दावने मृदुप्रवालोत्तरपुष्पशय्ये (त्वया) यौवनश्रीः निर्विश्यताम्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) संभाव्येति॥ युवानममुं सुषेणं भर्तारं संभाव्य मत्वा। पतित्वेनाङ्गीकृत्येत्यर्थः। मृदुप्रवालोत्तरोपरिप्रस्तारितकोमलपल्लवा पुष्पशय्या यस्मिंस्तत्तस्मिश्चैत्ररथात्कुबेरोद्यानादनूने वृन्दावने वृन्दावननामक उद्याने हे सुन्दरि!यौवनश्रीर्यौवनफलं निर्विश्यतां भुज्यताम् ॥
Summary AI O beautiful one, accepting this young man as your husband, let the splendor of your youth be enjoyed in Vrindavana, a place no less magnificent than Kubera's garden, on a bed of flowers laid over soft sprouts.
सारांश AI हे सुंदरी! इस युवा राजा को पति चुनकर तुम वृंदावन के पुष्पों और लताओं के बीच अपनी युवावस्था के सुखों का आनंद लो।
पदच्छेदः AI
संभाव्यसंभाव्य (सम्√भू+ल्यप्) having accepted
भर्तारम्भर्तृ (२.१) as husband
अमुम्अदस् (२.१) this
युवानम्युवन् (२.१) young man
मृदुप्रवालोत्तरपुष्पशय्येमृदुप्रवालउत्तरपुष्पशय्या (७.१) on a bed of flowers placed over soft sprouts
वृन्दावनेवृन्दावन (७.१) in Vrindavana
चैत्ररथात्चैत्ररथ (५.१) than Chaitraratha
अनूनेअनून (७.१) not inferior
निर्विश्यताम्निर्विश्यताम् (निर्√विश् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) let it be enjoyed
सुन्दरिसुन्दरी (८.१) O beautiful one
यौवनश्रीःयौवनश्री (१.१) the splendor of youth
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
सं भा व्य र्ता मुं यु वा नं
मृ दु प्र वा लो त्त पु ष्प य्ये
वृ न्दा ने चै त्र था नू ने
नि र्वि श्य तां सु न्द रि यौ श्रीः
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