असौ महेन्द्राद्रिसमानसारः
पतिर्महेन्द्रस्य महोदधेश्च ।
यस्य क्षरत्सैन्यगजच्छलेन
यात्रासु यातीव पुरो महेन्द्रः ॥
असौ महेन्द्राद्रिसमानसारः
पतिर्महेन्द्रस्य महोदधेश्च ।
यस्य क्षरत्सैन्यगजच्छलेन
यात्रासु यातीव पुरो महेन्द्रः ॥
पतिर्महेन्द्रस्य महोदधेश्च ।
यस्य क्षरत्सैन्यगजच्छलेन
यात्रासु यातीव पुरो महेन्द्रः ॥
अन्वयः
AI
असौ महेन्द्राद्रिसमानसारः महेन्द्रस्य महोदधेः च पतिः (अस्ति)। यस्य यात्रासु क्षरत्सैन्यगजच्छलेन महेन्द्रः पुरः याति इव।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
असाविति॥ महेन्द्राद्रेः समानसारस्तुल्यसत्त्वोऽसौ हेमाङ्गदो महेन्द्रस्य नाम कुलपर्वतस्य महेन्द्राद्रेः समानसारस्तुल्यसत्त्वोऽसौ हेमाङ्गदो महेन्द्रस्य नाम कुलपर्वतस्य महोदधेश्च पतिः स्वामी। महेन्द्रमहोदधी एवास्य गिरिजलदुर्गे इति भावः। यस्य यात्रासु क्षरतां मदस्राविणां सैन्यगजानां छलेन महेन्द्रो महेन्द्राद्रिः पुरोऽग्रे यातीव। अद्रिकल्पा अस्य गजा इत्यर्थः॥
Summary
AI
This king, whose strength equals that of the Mahendra mountain, is the lord of both that mountain and the great ocean. During his military expeditions, it seems as if the Mahendra mountain itself moves ahead of him, under the guise of his army's rutting elephants.
सारांश
AI
ये महेंद्र पर्वत और महासागर के स्वामी हैं। इनकी युद्ध यात्राओं में हाथियों के झुंड को देखकर ऐसा लगता है मानो इंद्र स्वयं आगे चल रहे हों।
पदच्छेदः
AI
| असौ | अदस् (१.१) | this |
| महेन्द्राद्रिसमानसारः | महेन्द्र–अद्रि–समान–सार (१.१) | whose strength is equal to the Mahendra mountain |
| पतिः | पति (१.१) | lord |
| महेन्द्रस्य | महेन्द्र (६.१) | of the Mahendra mountain |
| महोदधेश्च | महा–उदधि (६.१)–च | and of the great ocean |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| क्षरत्सैन्यगजच्छलेन | क्षरत्–सैन्य–गज–छल (३.१) | under the pretext of his army's rutting elephants |
| यात्रासु | यात्रा (७.३) | in expeditions |
| याति | याति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | goes |
| इव | इव | as if |
| पुरः | पुरस् | in front |
| महेन्द्रः | महेन्द्र (१.१) | the Mahendra mountain |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | सौ | म | हे | न्द्रा | द्रि | स | मा | न | सा | रः |
| प | ति | र्म | हे | न्द्र | स्य | म | हो | द | धे | श्च |
| य | स्य | क्ष | र | त्सै | न्य | ग | ज | च्छ | ले | न |
| या | त्रा | सु | या | ती | व | पु | रो | म | हे | न्द्रः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.