अन्वयः
AI
असौ नृपः इन्दीवर-श्याम-तनुः, त्वम् (च) रोचना-गौर-शरीर-यष्टिः (असि) । वाम् योगः तडित्-तोयदयोः इव अन्योन्य-शोभा-परिवृद्धये अस्तु ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इन्दीवरेति॥ असौ नृप इन्दीवरश्यामतनुः, त्वं रोजना गोरोचनेव गौरी शरीरयष्टिर्यस्याः सा। ततस्तडित्तोयदयोर्विद्युन्मेघयोरिव वां युवयोर्योगः समागमोऽन्योन्यशोभायाः परिवृद्धयेऽस्तु ॥
Summary
AI
"This king has a body dark as a blue lotus, and you have a slender form fair as the rochana pigment. May your union, like that of lightning and a rain-cloud, be for the enhancement of each other's beauty."
सारांश
AI
ये राजा नीलकमल के समान श्याम वर्ण के हैं और तुम्हारा शरीर गोरोचन के समान गौर है। तुम दोनों का मिलन मेघ और बिजली की जोड़ी के समान परस्पर शोभा बढ़ाएगा।
पदच्छेदः
AI
| इन्दीवरश्यामतनुः | इन्दीवर–श्याम–तनु (१.१) | whose body is dark as a blue lotus |
| नृपः | नृप (१.१) | king |
| असौ | अदस् (१.१) | this |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| रोचनागौरशरीरयष्टिः | रोचना–गौर–शरीर–यष्टि (१.१) | whose slender body is fair as the rochana pigment |
| अन्योन्यशोभापरिवृद्धये | अन्योन्य–शोभा–परिवृद्धि (४.१) | for the enhancement of each other's beauty |
| वाम् | युष्मद् (६.२) | your |
| योगः | योग (१.१) | union |
| तडित्तोयदयोः | तडित्–तोयद (६.२) | of lightning and a cloud |
| इव | इव | like |
| अस्तु | अस्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may it be |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | न्दी | व | र | श्या | म | त | नु | नृ | पो | ऽसौ |
| त्वं | रो | च | ना | गौ | र | श | री | र | य | ष्टिः |
| अ | न्यो | न्य | शो | भा | प | रि | वृ | द्ध | ये | वां |
| यो | ग | स्त | डि | त्तो | य | द | यो | रि | वा | स्तु |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.