यस्मिन्महीं शासति वाणिनीनां
निद्रां विहारार्धपथे गतानाम् ।
वातोऽपि नास्रंसयदंशुकानि
को लम्बयेदाहरणाय हस्तम् ॥
यस्मिन्महीं शासति वाणिनीनां
निद्रां विहारार्धपथे गतानाम् ।
वातोऽपि नास्रंसयदंशुकानि
को लम्बयेदाहरणाय हस्तम् ॥
निद्रां विहारार्धपथे गतानाम् ।
वातोऽपि नास्रंसयदंशुकानि
को लम्बयेदाहरणाय हस्तम् ॥
अन्वयः
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यस्मिन् महीम् शासति (सति), विहार-अर्ध-पथे निद्राम् गतानाम् वाणिनीनाम् अंशुकानि वातः अपि न अस्रंसयत् । कः आहरणाय हस्तम् लम्बयेत्?
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
यस्मिन्निति॥ यस्मिन् दिलीपे महीं शासति सति। विहरत्यत्रेति विहारः क्रीडास्थानम्। तस्यार्धपथे निद्रां गतानां वाणिनीनां मत्ताङ्गनानाम्।
वाणिनी नर्तकीमत्ताविदग्धवनितासु च इति विश्वः। वाणिन्यौ नर्तकीमत्तेैइत्यमरश्च। अंशुकानि वस्त्राणि वातोऽपि नास्रंसयन्नाकम्पयत्। आहरणायापहर्तुं को हस्तं लम्बयेत्? तस्याज्ञासिद्धत्वादकुतोभयसंचाराः प्रजा इत्यर्थः। अर्धश्चासौ पन्थाश्चेति विग्रहः। समप्रविभागे प्रमाणाभावान्नैकदेशिसमासः ॥
Summary
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"While he (Dilipa) ruled the earth, even the wind did not dare to displace the garments of female artisans who had fallen asleep halfway through their pleasure walks. Who then would dare stretch out a hand to steal them?"
सारांश
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दिलीप के शासन में नैतिकता ऐसी थी कि मार्ग में सोती हुई स्त्रियों के वस्त्र वायु भी नहीं हटा पाती थी, फिर किसी मनुष्य द्वारा चोरी का साहस करना तो असंभव था।
पदच्छेदः
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| यस्मिन् | यद् (७.१) | While he |
| महीम् | मही (२.१) | the earth |
| शासति | शासत् (√शास्+शतृ, ७.१) | was ruling |
| वाणिनीनाम् | वाणिनी (६.३) | of female artisans |
| निद्राम् | निद्रा (२.१) | sleep |
| विहारार्धपथे | विहार–अर्ध–पथ (७.१) | halfway on their pleasure walk |
| गतानाम् | गत (√गम्+क्त, ६.३) | who had gone to |
| वातः | वात (१.१) | the wind |
| अपि | अपि | even |
| न | न | not |
| अस्रंसयत् | अस्रंसयत् (√स्रंस् +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | displace |
| अंशुकानि | अंशुक (२.३) | the garments |
| कः | किम् (१.१) | Who |
| लम्बयेत् | लम्बयेत् (√लम्ब् +णिच् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would stretch out |
| आहरणाय | आहरण (४.१) | to steal |
| हस्तम् | हस्त (२.१) | a hand |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | स्मि | न्म | हीं | शा | स | ति | वा | णि | नी | नां |
| नि | द्रां | वि | हा | रा | र्ध | प | थे | ग | ता | नाम् |
| वा | तो | ऽपि | ना | स्रं | स | य | दं | शु | का | नि |
| को | ल | म्ब | ये | दा | ह | र | णा | य | ह | स्तम् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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