ततः सुनन्दावचनावसाने
लज्जां तनूकृत्य नरेन्द्रकन्या ।
दृष्ट्या प्रसादामलया कुमारं
प्रत्यग्रहीत्संवरणस्रजेव ॥

अन्वयः AI ततः सुनन्दावचन-अवसाने नरेन्द्रकन्या लज्जाम् तनूकृत्य, प्रसाद-अमलया दृष्ट्या कुमारम् संवरण-स्रजा इव प्रत्यग्रहीत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) तत इति॥ ततः सुनन्दावचनस्यावसानेऽन्ते नरेन्द्रकन्येन्दुमती लज्जां तनूकृत्य संकोच्य प्रसादेन मनःप्रसादेनामलया प्रसन्नया दृष्ट्या संवरणस्य स्रजा स्वयंवरणार्थं स्रजेव कुमारमजं प्रत्यग्रहीत् स्वीचकार। सम्यक्सानुरागमपश्यदित्यर्थः ॥
Summary AI Then, at the end of Sunanda's speech, the princess (Indumati), lessening her shyness, accepted the prince (Aja) with her clear and gracious glance, as if she were placing the wedding garland on him.
सारांश AI सुनंदा की बात सुनकर इंदुमती ने अपनी लज्जा त्याग दी और प्रसन्नता भरी दृष्टि से राजकुमार अज को इस प्रकार देखा, मानो उन्हें वरमाला पहना दी हो।
पदच्छेदः AI
ततःततः Then
सुनन्दावचनावसानेसुनन्दावचनअवसान (७.१) at the end of Sunanda's words
लज्जाम्लज्जा (२.१) shyness
तनूकृत्यतनूकृत्य (तनू√कृ+ल्यप्) having lessened
नरेन्द्रकन्यानरेन्द्रकन्या (१.१) the princess
दृष्ट्यादृष्टि (३.१) with a glance
प्रसादमलयाप्रसादअमला (३.१) clear and gracious
कुमारम्कुमार (२.१) the prince
प्रत्यग्रहीत्प्रत्यग्रहीत् (प्रति√ग्रह् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) accepted
संवरणस्रजासंवरणस्रज् (३.१) with the wedding garland
इवइव as if
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
तः सु न्दा ना सा ने
ज्जां नू कृ त्य रे न्द्र न्या
दृ ष्ट्या प्र सा दा या कु मा रं
प्र त्य ग्र ही त्सं स्र जे
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