अन्वयः
AI
ततः करेणुकायाः आशु अवतीर्य सः कामरूप-ईश्वर-दत्त-हस्तः अथो वैदर्भ-निर्दिष्टम् चतुष्कम् अन्तः विवेश, नारी-मनांसि इव ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तत इति॥ ततोऽनन्तरं करेणुकाया हस्तिन्याः सकाशादाशु शीघ्रमवतीर्य। कामरूपेश्वरे दत्तो हस्तो येन सोऽजः। अथो अनन्तरं वैदर्भेण निर्दिष्टं प्रदर्शितमन्तश्चतुष्कं चत्वरम्। नारीणां मनांसीव विवेश ॥
Summary
AI
Then, quickly dismounting from the female elephant, he, with his hand supported by the king of Kamarupa, entered the inner courtyard shown by the king of Vidarbha, just as he had entered the minds of the women.
सारांश
AI
कामरूप के राजा के हाथ का सहारा लेकर अज हथिनी से उतरे और विदर्भराज द्वारा निर्दिष्ट उस अंतःपुर में प्रविष्ट हुए, जैसे वे स्त्रियों के मन में समा गए हों।
पदच्छेदः
AI
| ततः | ततः | then |
| अवतीर्य | अवतीर्य (अव√तृ+ल्यप्) | having descended |
| आशु | आशु | quickly |
| करेणुकायाः | करेणुका (५.१) | from the female elephant |
| सः | तद् (१.१) | he |
| कामरूपेश्वरदत्तहस्तः | कामरूप-ईश्वर–दत्त–हस्त (१.१) | whose hand was supported by the king of Kamarupa |
| वैदर्भनिर्दिष्टम् | वैदर्भ–निर्दिष्ट (२.१) | shown by the king of Vidarbha |
| अथो | अथो | then |
| विवेश | विवेश (√विश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | entered |
| नारीमनांसि | नारी–मनस् (२.३) | the minds of women |
| इव | इव | like |
| चतुष्कम् | चतुष्क (२.१) | the inner courtyard |
| अन्तः | अन्तः | inside |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | ऽव | ती | र्या | शु | क | रे | णु | का | याः |
| स | का | म | रू | पे | श्व | र | द | त्त | ह | स्तः |
| वै | द | र्भ | नि | र्दि | ष्ट | म | थो | वि | वे | श |
| ना | री | म | नां | सी | व | च | तु | ष्क | म | न्तः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.