दुकूलवासाः स वधूसमीपं
निन्ये विनीतैरवरोधरक्षैः ।
वेलासकाशं स्फुटफेनराजि-
र्नवैरुदन्वानिव चन्द्रपादैः ॥

अन्वयः AI दुकूल-वासाः सः विनीतैः अवरोध-रक्षैः वधू-समीपम् निन्ये, नवैः चन्द्र-पादैः स्फुट-फेन-राजिः उदन्वान् वेला-सकाशम् (नीयते) इव ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) दुकूलेति॥ दुकूलवासाः सोऽजः विनीतैर्नम्रैरवरोधरक्षैरन्तःपुराधिकृतैर्वधूसमीपं निन्ये। तत्र दृष्टन्तः-स्फुटफेनराजिरुदन्वान् समुद्रो नवैर्नूतनैश्चन्द्रपादैश्चन्द्रकिरणैर्वेलायाः सकाशं समीपमिव। पूर्णदृष्टान्तोऽयम् ॥
Summary AI Dressed in silk, he was led by courteous harem guards to the bride's side, just as the ocean, with its distinct line of foam, is led towards the shore by the new moonbeams.
सारांश AI रेशमी वस्त्र धारण किए हुए अज को विनीत रक्षकों ने वधू के पास पहुँचाया। वे वैसे ही लग रहे थे जैसे चन्द्रमा की किरणों के प्रभाव से लहराता हुआ समुद्र तट की ओर बढ़ता है।
पदच्छेदः AI
दुकूलवासाःदुकूलवासस् (१.१) dressed in silk
सःतद् (१.१) he
वधूसमीपम्वधूसमीप (२.१) near the bride
निन्येनिन्ये (√नी भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) was led
विनीतैःविनीत (३.३) by the courteous
अवरोधरक्षैःअवरोधरक्ष (३.३) harem guards
वेलासकाशम्वेलासकाश (२.१) near the shore
स्फुटफेनराजिःस्फुटफेनराजि (१.१) with a clear line of foam
नवैःनव (३.३) by the new
उदन्वान्उदन्वत् (१.१) the ocean
इवइव like
चन्द्रपादैःचन्द्रपाद (३.३) moonbeams
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
दु कू वा साः धू मी पं
नि न्ये वि नी तै रो क्षैः
वे ला का शं स्फु फे रा जि
र्न वै रु न्वा नि न्द्र पा दैः
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