नितम्बगुर्वी गुरुणा प्रयुक्ता
वधूर्विधातृप्रतिमेन तेन ।
चकार सा मत्तचकोरनेत्रा
लज्जावती लाजविसर्गमग्नौ ॥

अन्वयः AI नितम्ब-गुर्वी, मत्त-चकोर-नेत्रा, लज्जावती सा वधूः विधातृ-प्रतिमेन तेन गुरुणा प्रयुक्ता (सती) अग्नौ लाज-विसर्गम् चकार ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) नितम्बेति॥ नितम्बेन गुर्व्यलघ्वी। दुर्धरालघुनोर्गुर्वी इति शाश्वतः। विधातृप्रतिमेन ब्रह्मतुल्येन तेन गुरुणा याचकेन प्रयुक्ता जुहुधि इति नियुक्ता। मत्तचकोरस्येव नेत्रे यस्याः सा वधूः। अग्नौ लाजविसर्गं चकार ॥
Summary AI Instructed by the priest, who was like the Creator himself, the shy bride—she with heavy hips and eyes like an intoxicated Chakora bird—performed the offering of parched grain into the fire.
सारांश AI ब्रह्मा के समान तेजस्वी पुरोहित द्वारा निर्देशित, चकोर जैसी आंखों वाली लज्जावती वधू ने पवित्र अग्नि में धान की खील (लाज) की आहुति दी।
पदच्छेदः AI
नितम्बगुर्वीनितम्बगुर्वी (१.१) she with heavy hips
गुरुणागुरु (३.१) by the preceptor (priest)
प्रयुक्ताप्रयुक्त (प्र√युज्+क्त, १.१) instructed
वधूःवधू (१.१) the bride
विधातृप्रतिमेनविधातृ–प्रतिम (३.१) who was like the Creator
तेनतद् (३.१) by him
चकारचकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) performed
सातद् (१.१) she
मत्तचकोरनेत्रामत्तचकोरनेत्र (१.१) whose eyes were like those of an intoxicated Chakora bird
लज्जावतीलज्जावत् (१.१) shy
लाजविसर्गम्लाजविसर्ग (२.१) the offering of parched grain
अग्नौअग्नि (७.१) into the fire
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
नि म्ब गु र्वी गु रु णा प्र यु क्ता
धू र्वि धा तृ प्र ति मे ते
का सा त्त को ने त्रा
ज्जा ती ला वि र्ग ग्नौ
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