भर्तापि तावत्क्रथकैशिकाना-
मनुष्ठितानन्तरजाविवाहः ।
सत्त्वानुरूपाहरणीकृतश्रीः
प्रास्थापयद्राघवमन्वगाञ्च ॥
भर्तापि तावत्क्रथकैशिकाना-
मनुष्ठितानन्तरजाविवाहः ।
सत्त्वानुरूपाहरणीकृतश्रीः
प्रास्थापयद्राघवमन्वगाञ्च ॥
मनुष्ठितानन्तरजाविवाहः ।
सत्त्वानुरूपाहरणीकृतश्रीः
प्रास्थापयद्राघवमन्वगाञ्च ॥
अन्वयः
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तावत् क्रथकैशिकानाम् भर्ता, अनुष्ठित-अनन्तरजा-विवाहः, सत्त्व-अनुरूप-आहरणीकृत-श्रीः (सन्), राघवम् प्रास्थापयत्, च अन्वगात्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
भर्तेति॥ अनुष्ठितः संपादितोऽनन्तरजाया अनुजाया विवाहो येन स तथोक्तः क्रथकैशिकानां देशानां भर्ता स्वामी भोजोऽपि तावत् तदा सत्त्वानुरूपमुत्साहानुरूपं यथा तथा। आ समन्तात्। अनेनानियतवस्तुदानमित्यर्थः। हरणं कन्यायै देयं धनम्।
यौतकादि तु यद्देयं सुदायो हरणं च तत् इत्यमरः (अमरकोशः २.८.२८ ) । आहरणीकृता श्रीर्येन तथोक्तः सन्, राघवमजं प्रास्थापयत् प्रस्थापितवान्। स्वयमन्वगादनुजगाम च ॥
Summary
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The king of the Vidarbhas (Bhoja), having performed his younger sister's wedding and presented gifts befitting Aja's prowess, sent Raghava off and also followed him for some distance.
सारांश
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विवाह के पश्चात राजा भोज ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार अज को विदाई का धन-ऐश्वर्य प्रदान किया और स्वयं भी उनके सम्मान में कुछ दूर तक पीछे-पीछे गए।
पदच्छेदः
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| भर्ता | भर्तृ (१.१) | the lord (Bhoja) |
| अपि | अपि | also |
| तावत् | तावत् | for some distance |
| क्रथकैशिकानाम् | क्रथकैशिक (६.३) | of the Krathakaishikas (Vidarbhas) |
| अनुष्ठित-अनन्तरजा-विवाहः | अनुष्ठित–अनन्तरजा–विवाह (१.१) | who had performed the marriage of his younger sister |
| सत्त्व-अनुरूप-आहरणीकृत-श्रीः | सत्त्व–अनुरूप–आहरणीकृत–श्री (१.१) | who had presented gifts befitting his prowess |
| प्रास्थापयत् | प्रास्थापयत् (प्र√स्था +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | sent off |
| राघवम् | राघव (२.१) | Raghava (Aja) |
| अन्वगात् | अन्वगात् (अनु√गम् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | followed |
| च | च | and |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | र्ता | पि | ता | व | त्क्र | थ | कै | शि | का | ना |
| म | नु | ष्ठि | ता | न | न्त | र | जा | वि | वा | हः |
| स | त्त्वा | नु | रू | पा | ह | र | णी | कृ | त | श्रीः |
| प्रा | स्था | प | य | द्रा | घ | व | म | न्व | गा | ञ्च |
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