तस्याः स रक्षार्थमनल्पयोध-
मादिश्य पित्र्यं सचिवं कुमारः ।
प्रत्यग्रहीत्पार्थिववाहिनीं तां
भागीरथीं शोण इवोत्तरंगः ॥
तस्याः स रक्षार्थमनल्पयोध-
मादिश्य पित्र्यं सचिवं कुमारः ।
प्रत्यग्रहीत्पार्थिववाहिनीं तां
भागीरथीं शोण इवोत्तरंगः ॥
मादिश्य पित्र्यं सचिवं कुमारः ।
प्रत्यग्रहीत्पार्थिववाहिनीं तां
भागीरथीं शोण इवोत्तरंगः ॥
अन्वयः
AI
सः कुमारः तस्याः रक्षार्थम् अनल्प-योधम् पित्र्यम् सचिवम् आदिश्य, उत्-तरंगः शोणः भागीरथीम् इव, ताम् पार्थिव-वाहिनीम् प्रत्यग्रहीत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्या इति॥ स कुमारोऽजस्तस्या इन्दुमत्या रक्षार्थमनल्पयोधं बहुभटम्। पितुरागंत पित्र्यम्। आप्तमित्यर्थः। सचिवमादिश्याज्ञाप्य तां पार्थिव वाहिनीं रामसेनाम्।
ध्वजिनी वाहिनी सेना इत्यमरः (अमरकोशः २.८.७८ ) । भागीरथीमुत्तरंगः शोणः शोणाख्यो नद इव। प्रत्यग्रहीदभियुक्तवान् ॥
Summary
AI
Prince Aja, having commanded his father's minister with numerous soldiers for her protection, confronted that army of kings, just as the high-waved Shona river confronts the Ganges.
सारांश
AI
वधू की रक्षा के लिए पिता के विश्वासपात्र मंत्री को सेना सहित नियुक्त कर, राजकुमार अज शत्रु सेना की ओर वैसे ही बढ़े जैसे शोण नद गंगा की ओर बढ़ता है।
पदच्छेदः
AI
| तस्याः | तद् (६.१) | her |
| सः | तद् (१.१) | he |
| रक्षार्थम् | रक्षा–अर्थम् | for the sake of protection |
| अनल्प-योधम् | अनल्प–योध (२.१) | with numerous soldiers |
| आदिश्य | आदिश्य (आ√दिश्+ल्यप्) | having commanded |
| पित्र्यम् | पित्र्य (२.१) | paternal |
| सचिवम् | सचिव (२.१) | minister |
| कुमारः | कुमार (१.१) | the prince (Aja) |
| प्रत्यग्रहीत् | प्रत्यग्रहीत् (प्रति√ग्रह् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | confronted |
| पार्थिव-वाहिनीम् | पार्थिव–वाहिनी (२.१) | the army of the kings |
| ताम् | तद् (२.१) | that |
| भागीरथीम् | भागीरथी (२.१) | the Bhagirathi (Ganges) |
| शोणः | शोण (१.१) | the Shona river |
| इव | इव | like |
| उत्-तरंगः | उद्–तरंग (१.१) | with high waves |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्याः | स | र | क्षा | र्थ | म | न | ल्प | यो | ध |
| मा | दि | श्य | पि | त्र्यं | स | चि | वं | कु | मा | रः |
| प्र | त्य | ग्र | ही | त्पा | र्थि | व | वा | हि | नीं | तां |
| भा | गी | र | थीं | शो | ण | इ | वो | त्त | रं | गः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.