पत्तिः पदातिं रथिनं रथेश-
स्तुरंगसादी तुरगाधिरूढम् ।
यन्ता गजस्याभ्यपतद्गजस्थं
तुल्यप्रतिद्वन्द्वि बभूव युद्धम् ॥
पत्तिः पदातिं रथिनं रथेश-
स्तुरंगसादी तुरगाधिरूढम् ।
यन्ता गजस्याभ्यपतद्गजस्थं
तुल्यप्रतिद्वन्द्वि बभूव युद्धम् ॥
स्तुरंगसादी तुरगाधिरूढम् ।
यन्ता गजस्याभ्यपतद्गजस्थं
तुल्यप्रतिद्वन्द्वि बभूव युद्धम् ॥
अन्वयः
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पत्तिः पदातिम्, रथ-ईशः रथिनम्, तुरंग-सादी तुरग-अधिरूढम्, गजस्य यन्ता गज-स्थम् अभ्यपतत्। युद्धम् तुल्य-प्रतिद्वन्द्वि बभूव।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
पत्तिरिति॥ पत्तिः पादचारो योद्धा पदातिं पादचारमभ्यपतत्। पदा पादाभ्यामततीति पदातिः ।
पादस्य पद्- (अष्टाध्यायी ६.३.५२ ) इत्यादिना पदादेशः। पदातिपत्तिपदगपादातिकपदाजयः इत्यमरः (अमरकोशः २.८.६६ ) । रथेशो रथिको रथिनं रथारोहमभ्यपतत्। तुरंगसाद्यश्वारोहस्तुरगाधिरूढमश्वारोहमभ्यपतत्। रथिनः स्यन्दनारोहा अश्वारोहास्तु सादिनः इत्यमरः (अमरकोशः २.८.६० ) । गजस्य यन्ता हस्त्यारोहो गजस्थं पुरुषमभ्यपतत्। इत्थमनेन प्रकारेण तुल्यप्रतिद्वन्द्व्येकजातीयप्रतिभटं युद्धं बभूव। अन्योन्यं द्वन्द्वं कलहोऽस्त्येषामिति प्रतिद्वन्द्विनो योधाः। द्वन्द्वं कलहयुग्मयोः इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.२२३ ) ॥
Summary
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Foot-soldiers rushed at foot-soldiers, chariot-lords at chariot-warriors, horse-riders at those mounted on horses, and elephant-drivers at those stationed on elephants. The battle was fought between equally matched opponents.
सारांश
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युद्ध में पैदल से पैदल, रथी से रथी, घुड़सवार से घुड़सवार और हाथी सवार से हाथी सवार भिड़ गए। इस प्रकार समान योद्धाओं के बीच भीषण संग्राम होने लगा।
पदच्छेदः
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| पत्तिः | पत्ति (१.१) | a foot-soldier |
| पदातिम् | पदाति (२.१) | a foot-soldier |
| रथिनम् | रथिन् (२.१) | a chariot-warrior |
| रथ-ईशः | रथ–ईश (१.१) | a chariot-lord |
| तुरंग-सादी | तुरंग–सादिन् (१.१) | a horse-rider |
| तुरग-अधिरूढम् | तुरग–अधिरूढ (२.१) | one mounted on a horse |
| यन्ता | यन्तृ (१.१) | a driver |
| गजस्य | गज (६.१) | of an elephant |
| अभ्यपतत् | अभ्यपतत् (अभि√पत् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | rushed towards |
| गज-स्थम् | गज–स्थ (२.१) | one stationed on an elephant |
| तुल्य-प्रतिद्वन्द्वि | तुल्य–प्रतिद्वन्द्विन् (१.१) | with equally matched opponents |
| बभूव | बभूव (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| युद्धम् | युद्ध (१.१) | the battle |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | त्तिः | प | दा | तिं | र | थि | नं | र | थे | श |
| स्तु | रं | ग | सा | दी | तु | र | गा | धि | रू | ढम् |
| य | न्ता | ग | ज | स्या | भ्य | प | त | द्ग | ज | स्थं |
| तु | ल्य | प्र | ति | द्व | न्द्वि | ब | भू | व | यु | द्धम् |
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