रथो रथाङ्गध्वनिना विजज्ञे
विलोलघण्टाक्वणितेन नागः ।
स्वभर्तृनामग्रहणाद्बभूव
सान्द्रे रजस्यात्मपरावबोधः ॥
रथो रथाङ्गध्वनिना विजज्ञे
विलोलघण्टाक्वणितेन नागः ।
स्वभर्तृनामग्रहणाद्बभूव
सान्द्रे रजस्यात्मपरावबोधः ॥
विलोलघण्टाक्वणितेन नागः ।
स्वभर्तृनामग्रहणाद्बभूव
सान्द्रे रजस्यात्मपरावबोधः ॥
अन्वयः
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सान्द्रे रजसि रथः रथ-अङ्ग-ध्वनिना, नागः विलोल-घण्टा-क्वणितेन विजज्ञे। आत्म-पर-अवबोधः स्व-भर्तृ-नाम-ग्रहणात् बभूव।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
रथ इति॥ सान्द्रे प्रवृद्धे रजसि रथो रथाङ्गध्वनिना चक्रस्वनेन विजज्ञे ज्ञातः। नागो हस्ती विलोलानां घण्टानां क्वणितेन नदिन विजज्ञे। आत्मपरावबोधः स्वपरविवेकः। योधानामिति शेषः। स्वभर्तॄणां स्वस्वामिनां नामग्रहणान्नामोञ्चारणाद्बभूव। रजोऽन्धतया सर्वे स्वं परं च शब्दादेवानुमाय प्रजह्रुरित्यर्थः ॥
Summary
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In the thick dust, a chariot was recognized by the sound of its wheels, and an elephant by the jingling of its swaying bells. The recognition of friend and foe occurred only through the utterance of their respective masters' names.
सारांश
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सघन धूल के कारण जब कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, तब रथों के पहियों की गूँज, हाथियों की घण्टियों की आवाज़ और योद्धाओं द्वारा अपने स्वामियों का नाम पुकारने से ही अपनों और शत्रुओं की पहचान हो सकी।
पदच्छेदः
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| रथः | रथ (१.१) | a chariot |
| रथ-अङ्ग-ध्वनिना | रथ–अङ्ग–ध्वनि (३.१) | by the sound of its wheels |
| विजज्ञे | विजज्ञे (वि√ज्ञा भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was recognized |
| विलोल-घण्टा-क्वणितेन | विलोल–घण्टा–क्वणित (३.१) | by the jingling of its swaying bells |
| नागः | नाग (१.१) | an elephant |
| स्व-भर्तृ-नाम-ग्रहणात् | स्व–भर्तृ–नाम–ग्रहण (५.१) | from the utterance of their masters' names |
| बभूव | बभूव (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | occurred |
| सान्द्रे | सान्द्र (७.१) | in the thick |
| रजसि | रजस् (७.१) | dust |
| आत्म-पर-अवबोधः | आत्मन्–पर–अवबोध (१.१) | the recognition of friend and foe |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | थो | र | था | ङ्ग | ध्व | नि | ना | वि | ज | ज्ञे |
| वि | लो | ल | घ | ण्टा | क्व | णि | ते | न | ना | गः |
| स्व | भ | र्तृ | ना | म | ग्र | ह | णा | द्ब | भू | व |
| सा | न्द्रे | र | ज | स्या | त्म | प | रा | व | बो | धः |
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