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आवृण्वतो लोचनमार्गमाजौ
रजोन्धकारस्य विजृम्भितस्य ।
शस्त्रक्षताश्वद्विपवीरजन्मा
बालारुणोऽभूद्रुधिरप्रवाहः ॥

अन्वयः AI आजौ लोचन-मार्गम् आवृण्वतः विजृम्भितस्य रजः-अन्धकारस्य, शस्त्र-क्षत-अश्व-द्विप-वीर-जन्मा रुधिर-प्रवाहः बाल-अरुणः अभूत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) आवृण्वत इति॥ लोचनमार्गमावृण्वतो दृष्टिपथमुपरुन्धतः। आजौ युद्धे विजृम्भितस्य व्याप्तस्य। रज एवान्धकारं तस्य। शस्त्रक्षतेभ्योऽश्वद्विपवीरेभ्यो जन्म यस्य स तथोक्तो रुधिरप्रवाहो बालारुणो बालार्कोऽभूत्। अरुणो भास्करेऽपि स्यात् इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.५५ ) । बालविशेषणं रुधइरसावर्ण्यार्थम् ॥
Summary AI In the battle, for the spreading darkness of dust that covered the path of sight, the flow of blood—born from the weapon-wounded horses, elephants, and heroes—became like the morning sun, dispelling the gloom.
सारांश AI युद्ध के मैदान में छाई धूल के अन्धकार को शत्रुओं के शस्त्रों से घायल घोड़ों, हाथियों और योद्धाओं के शरीर से निकलने वाली रक्त की धाराओं ने बाल सूर्य की भाँति लालिमा से आलोकित कर दिया।
पदच्छेदः AI
आवृण्वतःआवृण्वत् (आ√वृ+शतृ, ६.१) of the covering
लोचन-मार्गम्लोचनमार्ग (२.१) the path of sight
आजौआजि (७.१) in the battle
रजः-अन्धकारस्यरजस्अन्धकार (६.१) of the darkness of dust
विजृम्भितस्यविजृम्भित (वि√जृम्भ्+क्त, ६.१) which had spread
शस्त्र-क्षत-अश्व-द्विप-वीर-जन्माशस्त्रक्षतअश्वद्विपवीरजन्मन् (१.१) born from the weapon-wounded horses, elephants, and heroes
बाल-अरुणःबालअरुण (१.१) like the morning sun
अभूत्अभूत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) became
रुधिर-प्रवाहःरुधिरप्रवाह (१.१) the flow of blood
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
वृ ण्व तो लो मा र्ग मा जौ
जो न्ध का स्य वि जृ म्भि स्य
स्त्र क्ष ता श्व द्वि वी न्मा
बा ला रु णो ऽभू द्रु धि प्र वा हः
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