आधोरणानां गजसंनिपाते
शिरांसि चक्रैर्निशितैः क्षुराग्रैः ।
हतान्यपि श्येननखाग्रकोटि-
व्यासक्तकेशानि चिरेण पेतुः ॥
आधोरणानां गजसंनिपाते
शिरांसि चक्रैर्निशितैः क्षुराग्रैः ।
हतान्यपि श्येननखाग्रकोटि-
व्यासक्तकेशानि चिरेण पेतुः ॥
शिरांसि चक्रैर्निशितैः क्षुराग्रैः ।
हतान्यपि श्येननखाग्रकोटि-
व्यासक्तकेशानि चिरेण पेतुः ॥
अन्वयः
AI
गज-संनिपाते निशितैः क्षुर-अग्रैः चक्रैः हतानि अपि आधोरणानाम् शिरांसि, श्येन-नख-अग्र-कोटि-व्यासक्त-केशानि (सन्ति), चिरेण पेतुः।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
आधोरणानामिति॥ गजसंनिपाते गजयुद्धे निशितैरत एव क्षुराग्रैः क्षुरस्याग्रमिवाग्रं येषां तैश्चक्रैरायुधविशेषैर्हृतानि छिन्नान्यपि। श्येनानां पक्षिविशेषाणाम्।
पक्षी श्येनः इत्यमरः (अमरकोशः २.८.५९ ) । नखाग्रकोटिषु व्यासक्ताः केशा येषां तानि। आधोरणानां हस्त्यारोहाणाम्। आधोरणा हस्तिपका हस्त्यारोहा निषादिनः इत्यमरः (अमरकोशः २.८.५९ ) । शिरांसि चिरेण पेतुः पतितानि। शिरः पातात्प्रागेवारुह्य पश्चादुत्पततां पक्षिणां नखेषु केशसङ्गश्चिरपातहेतुरिति भावः ॥
Summary
AI
In the clash of elephants, the heads of the riders, though severed by sharp, razor-edged discuses, fell to the ground only after a delay, as their hair remained entangled in the hawk-claw-like tips of the weapons.
सारांश
AI
हाथियों के आपसी टकराव में महावतों के सिर पैने चक्रों से काट दिए गए, किन्तु बाजों के पंजों में उनके बाल उलझ जाने के कारण वे सिर बहुत देर तक हवा में लटके रहे और देरी से भूमि पर गिरे।
पदच्छेदः
AI
| आधोरणानाम् | आधोरण (६.३) | of the elephant riders |
| गज-संनिपाते | गज–संनिपात (७.१) | in the clash of elephants |
| शिरांसि | शिरस् (१.३) | heads |
| चक्रैः | चक्र (३.३) | by discuses |
| निशितैः | निशित (३.३) | sharp |
| क्षुर-अग्रैः | क्षुर–अग्र (३.३) | with razor-like edges |
| हतानि | हत (√हन्+क्त, १.३) | severed |
| अपि | अपि | even though |
| श्येन-नख-अग्र-कोटि-व्यासक्त-केशानि | श्येन–नख–अग्र–कोटि–व्यासक्त–केश (१.३) | with their hair entangled in the sharp tips of hawk-like claws |
| चिरेण | चिरेण | after a long time |
| पेतुः | पेतुः (√पत् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | fell |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | धो | र | णा | नां | ग | ज | सं | नि | पा | ते |
| शि | रां | सि | च | क्रै | र्नि | शि | तैः | क्षु | रा | ग्रैः |
| ह | ता | न्य | पि | श्ये | न | न | खा | ग्र | को | टि |
| व्या | स | क्त | के | शा | नि | चि | रे | ण | पे | तुः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.