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उपान्तयोर्निष्कुषितं विहंगै-
राक्षिप्य तेभ्यः पिशितप्रियापि ।
केयूरकोटिक्षततालुदेशा
शिवा भुजच्छेदमपाचकार ॥

अन्वयः AI पिशित-प्रिया अपि शिवा, विहंगैः उपान्तयोः निष्कुषितम् भुज-च्छेदम् तेभ्यः आक्षिप्य, केयूर-कोटि-क्षत-तालु-देशा (सती), (तम्) अपाचकार।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) उपान्तयोरिति॥ उपान्तयोः प्रान्तयोर्विहंगैः पक्षिभिर्निष्कुषितं खण्डितम्। इण्निष्ठायाम् (अष्टाध्यायी ७.२.४७ ) इतीडागमः। भुजच्छेदं भुजखण्डं तेभ्यां विहंगेभ्य आक्षिप्याच्छिद्य पिशितप्रिया मांसप्रियाऽपि शिवा कोष्ट्री। शिवः कीलः शिवा क्रोष्ट्री इति विश्वः। केयूरकोट्याऽङ्गदाग्रेण क्षतस्तालुदेशो यस्याः सा सती। अपाचकारापसारयामास। किरतेः करोतेर्वा लिट्॥
Summary AI A she-jackal, though fond of flesh, snatched a severed arm that birds were tearing at from both ends. However, finding her palate pierced by the sharp point of the armlet on it, she threw the arm away.
सारांश AI एक सियारिन ने पक्षियों द्वारा नोचे गए एक कटे हुए हाथ को खाने के लिए उठाया, किन्तु उस पर लगे बाजूबन्द की नोंक से अपना तालु छिल जाने के कारण उसने उसे दूर फेंक दिया।
पदच्छेदः AI
उपान्तयोःउपान्त (७.२) from the two ends
निष्कुषितम्निष्कुषित (निस्√कुष्+क्त, २.१) torn out
विहंगैःविहंग (३.३) by the birds
आक्षिप्यआक्षिप्य (आ√क्षिप्+ल्यप्) having snatched
तेभ्यःतद् (५.३) from them
पिशित-प्रियापिशितप्रिया (१.१) fond of flesh
अपिअपि although
केयूर-कोटि-क्षत-तालु-देशाकेयूरकोटिक्षततालुदेश (१.१) she whose palate-region was pierced by the sharp end of an armlet
शिवाशिवा (१.१) a jackal
भुज-च्छेदम्भुजछेद (२.१) a severed arm
अपाचकारअपाचकार (अप+आ√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) threw away
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
पा न्त यो र्नि ष्कु षि तं वि हं गै
रा क्षि प्य ते भ्यः पि शि प्रि या पि
के यू को टि क्ष ता लु दे शा
शि वा भु च्छे पा का
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