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रथी निषङ्गी कवची धनुष्मा-
न्दृप्तः स राजन्यकमेकवीरः ।
निवारयामास महावराहः
कल्पक्षयोद्वृत्तमिवार्णवाम्भः ॥

अन्वयः AI रथी, निषङ्गी, कवची, धनुष्मान्, दृप्तः, एकवीरः सः (अजः) राजन्यकम् निवारयामास, महावराहः कल्पक्षय-उद्वृत्तम् अर्णव-अम्भः इव।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) रथीति॥ रथी रथारूढो निषङ्गी तूणीरवान्। तूणोपासङ्गतूणीरनिषङ्गा इषुधिर्द्वयोः इत्यमरः (अमरकोशः २.८.८८ ) । कवची वर्मधरो धनुष्मान् धनुर्धरो दृप्तो रणदृप्त एकवीरोऽसहायशूरः सोऽजो राजन्यकं राजसमूहम्। गोत्रोक्ष- (अष्टाध्यायी ४.२.३९ ) इत्यादिना वुञ्प्रत्ययः। महावराहो वराहावतारो विष्णुः कल्पक्षये कल्पान्तकाल उद्वृत्तमुद्वेलमर्णवाम्भ इव। निवारयामास ॥
Summary AI That proud, sole hero Aja—equipped with a chariot, quiver, armor, and bow—single-handedly held back the host of kings, just as the great cosmic boar (Vishnu's incarnation) held back the waters of the ocean swelling at the end of an eon.
सारांश AI रथ, कवच और धनुष से सुसज्जित वीर अज ने अकेले ही शत्रु राजाओं की सेना को वैसे ही रोक दिया, जैसे महावराह ने प्रलयकाल के उमड़ते हुए समुद्र को रोक दिया था।
पदच्छेदः AI
रथीरथिन् (१.१) with a chariot
निषङ्गीनिषङ्गिन् (१.१) with a quiver
कवचीकवचिन् (१.१) with armor
धनुष्मान्धनुष्मत् (१.१) with a bow
दृप्तःदृप्त (√दृप्+क्त, १.१) proud
सःतद् (१.१) he
राजन्यकम्राजन्यक (२.१) the host of kings
एकवीरःएकवीर (१.१) the sole hero
निवारयामासनिवारयामास (नि√वृ +णिच्+आम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) held back
महावराहःमहावराह (१.१) the great boar
कल्पक्षयोद्वृत्तम्कल्पक्षयउद्वृत्त (२.१) swollen at the end of an eon
इवइव like
अर्णवाम्भःअर्णवअम्भस् (२.१) the ocean's water
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
थी नि ङ्गी ची नु ष्मा
न्दृ प्तः रा न्य मे वी रः
नि वा या मा हा रा हः
ल्प क्ष यो द्वृ त्त मि वा र्ण वा म्भः
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