सशोणितैस्तेन शिलीमुखाग्रै-
र्निक्षेपिताः केतुषु पार्थिवानाम् ।
यशो हृतं संप्रति राघवेण
न जीवितं वः कृपयेति वर्णाः ॥
सशोणितैस्तेन शिलीमुखाग्रै-
र्निक्षेपिताः केतुषु पार्थिवानाम् ।
यशो हृतं संप्रति राघवेण
न जीवितं वः कृपयेति वर्णाः ॥
र्निक्षेपिताः केतुषु पार्थिवानाम् ।
यशो हृतं संप्रति राघवेण
न जीवितं वः कृपयेति वर्णाः ॥
अन्वयः
AI
तेन पार्थिवानाम् केतुषु स-शोणितैः शिलीमुख-अग्रैः "संप्रति राघवेण वः यशः हृतम्, कृपया जीवितम् न (हृतम्)" इति वर्णाः निक्षेपिताः।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सशोणितैरिति॥ संप्रति राघवेण रघुपुत्रेण। पूर्वं रघुणेति भावः। हे राजानः। वो युष्माकं यशो हृतं, जीवितं तु कृपया न हृतम्। न त्वशक्त्येति भावः। इत्येवंरूपा वर्णाः। एतदर्थप्रतिपादकं वाक्यमित्यर्थः। सशोणितैः शोणितदिग्धैः शिलीमुखाग्रैर्बाणाग्रैः साधनैस्तेनाजेन प्रयोजककर्त्रा। पार्थिवानां राज्ञां केतुषु ध्वजस्तम्भेषु निक्षेपिताः प्रयोज्यैरन्यैर्निवेशिताः लेखिता इत्यर्थः। क्षिपतेर्ण्यन्तात्कर्मणि क्तः ॥
Summary
AI
With the blood-stained tips of his arrows, he (Aja) inscribed these letters on the banners of the kings: "Your fame has now been taken by the descendant of Raghu; your lives have been spared out of mercy."
सारांश
AI
अज ने राजाओं की ध्वजाओं पर रक्त-रंजित बाणों से यह संदेश लिखवा दिया कि राघव ने दयावश तुम्हारा जीवन तो छोड़ दिया है, किंतु तुम्हारा यश हर लिया है।
पदच्छेदः
AI
| सशोणितैः | सशोणित (३.३) | with blood-stained |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| शिलीमुखाग्रैः | शिलीमुख–अग्र (३.३) | with arrow-tips |
| निक्षेपिताः | निक्षेपित (नि√क्षिप्+णिच्+क्त, १.३) | were inscribed |
| केतुषु | केतु (७.३) | on the banners |
| पार्थिवानाम् | पार्थिव (६.३) | of the kings |
| यशः | यशस् (१.१) | Fame |
| हृतम् | हृत (√हृ+क्त, १.१) | has been taken |
| संप्रति | संप्रति | now |
| राघवेण | राघव (३.१) | by the descendant of Raghu |
| न | न | not |
| जीवितम् | जीवित (१.१) | life |
| वः | युष्मद् (६.३) | your |
| कृपया | कृपा (३.१) | out of mercy |
| इति | इति | thus |
| वर्णाः | वर्ण (१.३) | the letters |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | शो | णि | तै | स्ते | न | शि | ली | मु | खा | ग्रै |
| र्नि | क्षे | पि | ताः | के | तु | षु | पा | र्थि | वा | नाम् |
| य | शो | हृ | तं | सं | प्र | ति | रा | घ | वे | ण |
| न | जी | वि | तं | वः | कृ | प | ये | ति | व | र्णाः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.