स चापकोटीनिहितैकबाहु
शिरस्त्रनिष्कर्षणभिन्नमौलिः ।
ललाटबद्धश्रमवारिबिन्दु-
र्भीतां प्रियामेत्य वचो बभाषे ॥
स चापकोटीनिहितैकबाहु
शिरस्त्रनिष्कर्षणभिन्नमौलिः ।
ललाटबद्धश्रमवारिबिन्दु-
र्भीतां प्रियामेत्य वचो बभाषे ॥
शिरस्त्रनिष्कर्षणभिन्नमौलिः ।
ललाटबद्धश्रमवारिबिन्दु-
र्भीतां प्रियामेत्य वचो बभाषे ॥
अन्वयः
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चाप-कोटि-निहित-एक-बाहुः, शिरस्त्र-निष्कर्षण-भिन्न-मौलिः, ललाट-बद्ध-श्रम-वारि-बिन्दुः सः भीताम् प्रियाम् एत्य वचः बभाषे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
स इति॥ चापकोट्यां निहित एकबाहुर्येन सः। शिरस्त्रस्य निष्कर्षणेनापनयनेन भिन्नमौलिः श्लथकेशबन्धः।
चूडाकिरीटं केशाश्च संयता मौलयस्त्रयः इत्यमरः। ललाटे बद्धाः श्रमवारिबिन्दवो यस्य सः सोऽजो भीतां प्रियामिन्दुमतीमेत्यासाद्य वचो बभाषे ॥
Summary
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With one arm resting on his bow-tip, his hair disheveled from removing his helmet, and with beads of sweat formed on his forehead, he (Aja) approached his frightened beloved (Indumati) and spoke these words.
सारांश
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धनुष के सिरे पर हाथ रखे, कवच उतारने से बिखरे बालों और माथे पर श्रमबिन्दुओं से युक्त राजकुमार ने अपनी डरी हुई प्रिया इंदुमती के पास जाकर यह वचन कहे।
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | He |
| चापकोटीनिहितैकबाहुः | चापकोटि–निहित–एक–बाहु (१.१) | with one arm resting on his bow-tip |
| शिरस्त्रनिष्कर्षणभिन्नमौलिः | शिरस्त्र–निष्कर्षण–भिन्न–मौलि (१.१) | with hair dishevelled from removing his helmet |
| ललाटबद्धश्रमवारिबिन्दुः | ललाट–बद्ध–श्रमवारि–बिन्दु (१.१) | with beads of sweat on his forehead |
| भीताम् | भीत (√भी+क्त, २.१) | frightened |
| प्रियाम् | प्रिया (२.१) | beloved |
| एत्य | एत्य (आ√इ+ल्यप्) | having approached |
| वचः | वचस् (२.१) | words |
| बभाषे | बभाषे (√भाष् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | spoke |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | चा | प | को | टी | नि | हि | तै | क | बा | हु |
| शि | र | स्त्र | नि | ष्क | र्ष | ण | भि | न्न | मौ | लिः |
| ल | ला | ट | ब | द्ध | श्र | म | वा | रि | बि | न्दु |
| र्भी | तां | प्रि | या | मे | त्य | व | चो | ब | भा | षे |
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