प्रसाधिकालम्बितमग्रपाद-
माक्षिप्य काचिद्द्रवरागमेव ।
उत्सृष्टलीलागतिरागवाक्षा-
दलक्तकाङ्कां पदवीं ततान ॥

अन्वयः AI काचित् प्रसाधिका-आलम्बितम् द्रव-रागम् एव अग्र-पादम् आक्षिप्य, उत्सृष्ट-लीला-गतिः (सती) आगवाक्षात् अलक्तक-अङ्काम् पदवीम् ततान ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) प्रसाधिकेति॥ काचित्। प्रसाधिकयाऽलंकर्त्र्या लम्बितं रञ्जनार्थं धृतं द्रवरागमेवार्द्रालक्तकमेव। अग्रश्चासौ पादश्चेत्यग्रपाद इति कर्मधारयसमासः। ``हस्ताग्राग्रहस्तादयो गुणगुणिनोर्भेदाभेदाभ्याम्`(का.सू.) इति वामनः। तमाक्षिप्याकृष्य। उत्सृष्टलीलागतिस्त्यक्तमन्दगमना सती। आ गवाक्षाद्गवाक्षपर्यन्तं पदवीं पन्थानमलक्तकाङ्कां लाक्षारागचिह्नां ततान विस्तारयामास ॥
Summary AI Another lady, hastily pulling back her foot which was being held by her maid for the application of wet lac-dye, abandoned her graceful gait and rushed to the window, leaving a trail of red footprints on the floor.
सारांश AI एक सुन्दरी ने श्रृंगारिका द्वारा रँगे जा रहे अपने पैर को बीच में ही खींच लिया और गीले महावर के साथ ही खिड़की की ओर भाग पड़ी, जिससे रास्ते भर उसके लाल पदचिह्न बन गए।
पदच्छेदः AI
प्रसाधिकालम्बितम्प्रसाधिकाआलम्बित (२.१) held by the maid-servant
अग्रपादम्अग्रपाद (२.१) her fore-foot
आक्षिप्यआक्षिप्य (आ√क्षिप्+ल्यप्) having pulled away
काचित्किञ्चित् (१.१) A certain lady
द्रवरागमेवद्रव–रागम् (२.१)एव while the lac-dye was still wet
उत्सृष्टलीलागतिःउत्सृष्टलीलागति (१.१) having abandoned her graceful gait
आगवाक्षात्आगवाक्ष (५.१) up to the window
अलक्तकाङ्कांअलक्तक–अङ्का (२.१) marked with lac-dye
पदवीम्पदवी (२.१) a path
ततानततान (√तन् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) made
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
प्र सा धि का म्बि ग्र पा
मा क्षि प्य का चि द्द्र रा मे
त्सृ ष्ट ली ला ति रा वा क्षा
क्त का ङ्कां वीं ता
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