इति शिरसि स वामं पादमाधाय राज्ञा-
मुदवहदनवद्यां तामवद्यादपेतः ।
रथतुरगरजोभिस्तस्य रूक्षालकाग्रा
समरविजयलक्ष्मीः सैव मूर्ता बभूव ॥
इति शिरसि स वामं पादमाधाय राज्ञा-
मुदवहदनवद्यां तामवद्यादपेतः ।
रथतुरगरजोभिस्तस्य रूक्षालकाग्रा
समरविजयलक्ष्मीः सैव मूर्ता बभूव ॥
मुदवहदनवद्यां तामवद्यादपेतः ।
रथतुरगरजोभिस्तस्य रूक्षालकाग्रा
समरविजयलक्ष्मीः सैव मूर्ता बभूव ॥
अन्वयः
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इति अवद्यात् अपेतः सः राज्ञाम् शिरसि वामम् पादम् आधाय ताम् अनवद्याम् उदवहत। तस्य रथ-तुरग-रजोभिः रूक्ष-अलक-अग्रा सा एव मूर्ता समर-विजय-लक्ष्मीः बभूव।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इतीति॥ नोद्यते नोच्त इत्यवद्यं गर्ह्यम्।
अवद्यपण्य- (अष्टाध्यायी ३.१.१०१ ) इत्यादिना निपातः। कुपूयकुत्सितावद्यखेटगर्ह्याणकाः समाः इत्यमरः (अमरकोशः ३.१.५४ ) । तस्मादपेतः। निर्दोष इत्यर्थः। सोऽज इति राज्ञां शिरसि वामं पादमाधायानवद्यामदोषां तामिन्दुमतीमुदवहदुपानयत्। आत्मसाञ्चकारेत्यर्थः। अयमर्थः तमुद्वहन्तं पथि भोजकन्याम्(७।३५)इत्यत्र न श्लिष्टः। तस्याजस्य रथतुरगाणां रजोभी रूक्षाणि परुषाण्यलकाग्राणि यस्याः सा सेन्दुमत्येव मूर्ता मूर्तिमती समरविजयलक्ष्मीर्बभूव। एतल्लाभादन्यः को विजयलक्ष्मीलाभ इत्यर्थः॥
Summary
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Thus, the blameless Aja, placing his left foot on the heads of the kings (in a gesture of conquest), married the flawless princess. She herself, with the tips of her hair roughened by the dust from his chariot and horses, became the very embodiment of his victory-fortune in battle.
सारांश
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पराजित राजाओं के मस्तक पर प्रतीकात्मक पैर रखकर निष्पाप अज ने इंदुमती को साथ लिया। रथों की धूल से धूसरित केशों वाली वह राजकुमारी साक्षात् साकार विजयलक्ष्मी जैसी लग रही थी।
पदच्छेदः
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| इति | इति | Thus |
| शिरसि | शिरस् (७.१) | on the heads |
| सः | तद् (१.१) | he |
| वामम् | वाम (२.१) | left |
| पादम् | पाद (२.१) | foot |
| आधाय | आधाय (आ√धा+ल्यप्) | having placed |
| राज्ञाम् | राजन् (६.३) | of the kings |
| उदवहत | उदवहत (उत्√वह् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | married |
| अनवद्याम् | अनवद्य (२.१) | the flawless one |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| अवद्यात् | अवद्य (५.१) | from blame |
| अपेतः | अपेत (अप√इ+क्त, १.१) | free |
| रथतुरगरजोभिः | रथ–तुरग–रजस् (३.३) | by the dust of the chariot and horses |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| रूक्षालकाग्रा | रूक्ष–अलक–अग्र (१.१) | she whose hair-tips were rough |
| समरविजयलक्ष्मीः | समर–विजय–लक्ष्मी (१.१) | the goddess of victory in battle |
| सा | तद् (१.१) | she |
| एव | एव | herself |
| मूर्ता | मूर्त (१.१) | embodied |
| बभूव | बभूव (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ति | शि | र | सि | स | वा | मं | पा | द | मा | धा | य | रा | ज्ञा |
| मु | द | व | ह | द | न | व | द्यां | ता | म | व | द्या | द | पे | तः |
| र | थ | तु | र | ग | र | जो | भि | स्त | स्य | रू | क्षा | ल | का | ग्रा |
| स | म | र | वि | ज | य | ल | क्ष्मीः | सै | व | मू | र्ता | ब | भू | व |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
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