अन्वयः
AI
अजः अजित-अधिगमाय नीति-विशारदैः मन्त्रिभिः युयुजे । रघुः अनपायि-पद-उपलब्धये आप्तैः योगिभिः समियाय ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अजितेति॥ अजोऽजिताधिगमायाजितपदलाभाय नीतिविशारदैर्नीतिज्ञैर्मन्त्रिभिर्युयुजे संगतः । रघुरप्यनपायिपदस्योपलब्धये मोक्षस्य प्राप्तये यथार्थदर्शिनो यथार्थवादिनश्चाप्ताः। तैर्योगिभिः समियाय संगमः। उभयत्राप्युपायचिन्तार्थमिति शेषः ॥
Summary
AI
Aja conferred with his ministers, who were experts in statecraft, to acquire what was not yet conquered. Raghu associated with accomplished yogis to attain the imperishable state (liberation).
सारांश
AI
अज ने शत्रुओं को जीतने के लिए नीति-कुशल मन्त्रियों का साथ लिया, और रघु ने अविनाशी पद की प्राप्ति के लिए योगियों की शरण ली।
पदच्छेदः
AI
| अजिताधिगमाय | अजित–अधिगम (४.१) | for the acquisition of the unconquered |
| मन्त्रिभिः | मन्त्रिन् (३.३) | with ministers |
| युयुजे | युयुजे (√युज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | conferred |
| नीतिविशारदैः | नीति–विशारद (३.३) | who were experts in statecraft |
| अजः | अज (१.१) | Aja |
| अनपायिपदोपलब्धये | अनपायिन्–पद–उपलब्धि (४.१) | for the attainment of the imperishable state |
| रघुः | रघु (१.१) | Raghu |
| आप्तैः | आप्त (√आप्त+क्त, ३.३) | with accomplished |
| समियाय | समियाय (सम्√इ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | associated |
| योगिभिः | योगिन् (३.३) | yogis |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | जि | ता | धि | ग | मा | य | म | न्त्रि | भि | |
| र्यु | यु | जे | नी | ति | वि | शा | र | दै | र | जः |
| अ | न | पा | यि | प | दो | प | ल | ब्ध | ये | |
| र | घु | रा | प्तैः | स | मि | या | य | यो | गि | भिः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.