अन्वयः
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क्षितिः च भामिनी इन्दुमती च तम् अग्र्य-पौरुषम् पतिम् आसाद्य, प्रथमा बहु-रत्न-सूः अभूत्, अपरा वीरं सुतम् अजीजनत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
क्षितिरिति॥ क्षितिर्मही भामिनी कामिनीन्दुमती च।
भामिनी कामिनी च इति हलायुधः। अग्र्यपौरुषं महापराक्रममुत्कृष्टभोगशक्तिं च तमजं पतिमासाद्य प्राप्य। तत्र प्रथमा क्षितिः। बहूनि रत्नानि श्रेष्ठवस्तूनि सूत इति बहुरतन्सूरभूत्। रत्नं स्वजातिश्रेष्ठेऽपि इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.१३४ ) । अपरेन्दुमती वीरं सुतमजीजनज्जनयति स्म। जायतेर्णौ लुङि रूपम्। सहोक्त्या सादृश्यमुच्यते॥
Summary
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Having obtained him (Aja) of foremost manliness as their husband, both the Earth and the beautiful Indumati flourished. The first (Earth) became the producer of many jewels, and the other (Indumati) gave birth to a heroic son.
सारांश
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श्रेष्ठ पुरुष अज को पति रूप में पाकर पृथ्वी रत्नों को उत्पन्न करने वाली बनी और पत्नी इन्दुमती ने एक वीर पुत्र को जन्म दिया।
पदच्छेदः
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| क्षितिः | क्षिति (१.१) | the Earth |
| इन्दुमती | इन्दुमती (१.१) | Indumati |
| च | च | and |
| भामिनी | भामिनी (१.१) | the beautiful lady |
| पतिम् | पति (२.१) | husband |
| आसाद्य | आसाद्य (आ√सद्+ल्यप्) | having obtained |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| अग्र्यपौरुषम् | अग्र्य–पौरुष (२.१) | of foremost manliness |
| प्रथमा | प्रथम (१.१) | the first |
| बहुरत्नसूः | बहु–रत्न–सू (१.१) | producer of many jewels |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| अपरा | अपर (१.१) | the other |
| वीरम् | वीर (२.१) | heroic |
| अजीजनत् | अजीजनत् (√जन् +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | gave birth to |
| सुतम् | सुत (२.१) | a son |
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