अन्वयः
AI
बुधाः यम् दश-रश्मि-शत-उपम-द्युतिं, यशसा दशसु दिक्षु अपि श्रुतं, दश-पूर्व-रथम् आख्यया, दश-कण्ठ-अरि-गुरुं विदुः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
दशेति॥ दश रश्मिशतानि यस्य स दशरश्मिशतः सूर्यः स उपमा यस्याः सा दशरश्मिशतोपमा द्युतिर्यस्य तम्। यशसा करणेन दशस्वपि दिक्ष्वाशासु श्रुतं प्रसिद्धम्। दशकण्ठारे रावणारे रामस्य गुरुं पितरं यं सुतम्। आख्यया नाम्ना दशपूर्वो
दश शब्दपूर्वो रथो रथशब्दस्तम्। दशरथमित्यर्थः। बुधा विद्वांसो विदुर्वदन्ति। विदो लटो वा (अष्टाध्यायी ३.४.८३ ) इति झेर्जुसादेशः ॥
Summary
AI
The wise know him (the son) as one whose splendor was like a hundred suns, who was famed in all ten directions, whose name was Dasharatha, and who was the father of the enemy of Ravana (i.e., Rama).
सारांश
AI
उस पुत्र को विद्वान 'दशरथ' के नाम से जानते हैं, जो दसों दिशाओं में यशस्वी, सूर्य के समान तेजस्वी और रावण के शत्रु श्रीराम के पिता थे।
पदच्छेदः
AI
| दशरश्मिशतोपमद्युतिं | दश–रश्मि–शत–उपम–द्युति (२.१) | one whose splendor was like a hundred suns |
| यशसा | यशस् (३.१) | by fame |
| दिक्षु | दिश् (७.३) | in the directions |
| दशसु | दशन् (७.३) | ten |
| अपि | अपि | even |
| श्रुतम् | श्रुत (√श्रु+क्त, २.१) | heard of |
| दशपूर्वरथं | दश–पूर्व–रथ (२.१) | Dasharatha by name |
| यम् | यद् (२.१) | whom |
| आख्यया | आख्या (३.१) | by name |
| दशकण्ठारिगुरुं | दशकण्ठ–अरि–गुरु (२.१) | the father of the enemy of the ten-necked one (Ravana) |
| विदुः | विदुः (√विद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | know |
| बुधाः | बुध (१.३) | the wise |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | श | र | श्मि | श | तो | प | म | द्यु | तिं | |
| य | श | सा | दि | क्षु | द | श | स्व | पि | श्रु | तम् |
| द | श | पू | र्व | र | थं | य | मा | ख्य | या | |
| द | श | क | ण्ठा | रि | गु | रुं | वि | दु | र्बु | धाः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.