अन्वयः
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मेदिनी तेन सह वसिष्ठ-संभृतैः सलिलैः अभिषेचनम् अनुभूय, विशद-उच्छ्वसितेन कृत-अर्थताम् कथयामास इव ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अनुभूयेति॥ मेदिनी भूमिर्महिषी च ध्वन्यते। वसिष्ठेन संभृतैः सलिलैस्तेनाजेन सहाभिषेचनमनुभूय विशदोच्छ्वसितेन स्फुटमुद्बृहणेन। आनन्दनिर्मलोच्छ्वसितेन चेति ध्वन्यते। कृतार्थतां गुणवद्भर्तृलाभकृतं साफल्यं कथयामासेव। न चैतावता पूर्वेषामपकर्षः;प्रशंसापरत्वात्।
सर्वत्र जयमन्विच्छेत् पुत्रादिच्छेत्पराजयम् इत्यङ्गीकृतत्वाञ्चज ॥
Summary
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Having experienced the coronation ceremony with Aja, with waters collected by Vasishtha, the Earth, through its clear exhalations (like fragrant breezes), seemed to express her sense of fulfillment.
सारांश
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वशिष्ठ द्वारा मन्त्रपूत जल से अज के साथ अभिषेक होने पर पृथ्वी ने मानो अपनी सुखद सुगन्ध से अपनी कृतार्थता प्रकट की।
पदच्छेदः
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| अनुभूय | अनुभूय (अनु√भू+ल्यप्) | having experienced |
| वसिष्ठसंभृतैः | वसिष्ठ–संभृत (सम्√भृ+क्त, ३.३) | by those collected by Vasistha |
| सलिलैः | सलिल (३.३) | with waters |
| तेन | तद् (३.१) | with him |
| सह | सह | with |
| अभिषेचनम् | अभिषेचन (अभि√सिच्, +ल्युट्, २.१) | the coronation |
| विशदोच्छ्वसितेन | विशद–उच्छ्वसित (उत्√श्वस्+क्त, ३.१) | by a clear exhalation |
| मेदिनी | मेदिनी (१.१) | the Earth |
| कथयामास | कथयामास (√कथ +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | expressed |
| कृतार्थताम् | कृत–अर्थ–ता (२.१) | fulfillment |
| इव | इव | as if |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | नु | भू | य | व | सि | ष्ठ | सं | भृ | तैः | |
| स | लि | लै | स्ते | न | स | हा | भि | षे | च | नम् |
| वि | श | दो | च्छ्व | सि | ते | न | मे | दि | नी | |
| क | थ | या | मा | स | कृ | ता | र्थ | ता | मि | व |
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