अन्वयः
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सा अमर-स्रक् वीरुधाम् आर्तवीं विभूतिम् मधु-गन्ध-अतिशयेन अभिभूय नृपतेः दयिता-उरु-स्तन-कोटि-सुस्थितिम् आप ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अभिभूयेति॥ साऽमरस्रग्दिव्यमाला। मधुगन्धयोर्मकरन्दसौरभयोरतिशयेनाधिक्येन। वीरुधां लतानाम्।
लता प्रतानिनी वीरुत् इत्यमरः (अमरकोशः २.४.९ ) । ऋतोः प्राप्तामार्तवीमृतुसंबन्धिनीं विभूतिं समृद्धिमभिभूय तिरस्कृत्य नृपतेरजस्य दयिताया इन्दुमत्या उर्वोर्विशालयोः स्तनयोर्ये कोटी चूचुकौ तयोः सुस्थितिं गोप्यस्थाने पतितत्वात्प्रशस्तं स्थानम् । आप प्राप्ता ॥
Summary
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That celestial garland, surpassing the seasonal splendor of the earthly creepers with its superior honey and fragrance, fell and found a fine resting place on the high bosom of the king's beloved, Indumati.
सारांश
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वह दिव्य माला अपनी सुगंध से ऋतुओं की शोभा को मात देती हुई रानी इन्दुमती के वक्षस्थल पर आ गिरी।
पदच्छेदः
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| अभिभूय | अभिभूय (अभि√भू+ल्यप्) | having surpassed |
| विभूतिम् | विभूति (२.१) | the splendor |
| आर्तवीम् | आर्तव (२.१) | seasonal |
| मधुगन्धातिशयेन | मधु–गन्ध–अतिशय (३.१) | by the excellence of its honey and fragrance |
| वीरुधाम् | वीरुध् (६.३) | of the creepers |
| नृपतेः | नृपति (६.१) | of the king |
| अमरस्रक् | अमर–स्रज् (१.१) | the celestial garland |
| आप | आप (√आप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attained |
| सा | तद् (१.१) | that |
| दयितोरुस्तनकोटिसुस्थितिम् | दयिता–उरु–स्तन–कोटि–सुस्थिति (२.१) | a fine resting place on the high bosom of his beloved |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | भि | भू | य | वि | भू | ति | मा | र्त | वीं | |
| म | धु | ग | न्धा | ति | श | ये | न | वी | रु | धाम् |
| नृ | प | ते | र | म | र | स्र | गा | प | सा | |
| द | यि | तो | रु | स्त | न | को | टि | सु | स्थि | तिम् |
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