क्षणमात्रसखीं सुजातयोः स्तनयोस्तामत्रलोक्य विह्वला । निमिमील नरोत्तमप्रिया हृतचन्द्रा तमसेव कौमुदी ॥
क्षणमात्रसखीं सुजातयोः स्तनयोस्तामत्रलोक्य विह्वला । निमिमील नरोत्तमप्रिया हृतचन्द्रा तमसेव कौमुदी ॥
अन्वयः
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सुजातयोः स्तनयोः क्षण-मात्र-सखीं ताम् अवलोक्य विह्वला नर-उत्तम-प्रिया, तमसा हृत-चन्द्रा कौमुदी इव, निमिमील ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
क्षणमिति॥ सुजातयोः सुजन्मनोः। सुन्दरयोरित्यर्थः। स्तनयोः क्षणमात्रं सखीं सखीमिव स्थिताम्। सुजातत्वसाधर्म्यात्स्रजः स्तनसखीत्वमिति भावः। तां स्रजमवलोक्येष्द्दृष्ट्वा विह्वला परवशा नरोत्तमप्रियेन्दुमती। तमसा राहुणा।
तमस्तु राहुः स्वर्भानुः इत्यमरः (अमरकोशः १.३.२८ ) । हृतचन्द्रा कौमुदी चन्द्रिकेव। निमिमील मुमोह, ममारेत्यर्थः। निमीलो दीर्घनिद्रा च इति हलायुधः। कौमुद्या निमीलनं प्रतिसंहारः ॥
Summary
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Seeing that garland, which was a companion to her well-formed breasts for only a moment, the beloved of the best of men became distressed and closed her eyes, like the moonlight when the moon is seized by darkness during an eclipse.
सारांश
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उस माला का स्पर्श होते ही राजा अज की प्रियतमा इन्दुमती ने अपनी आँखें मूंद लीं और वह वैसे ही धरती पर गिर पड़ी जैसे राहु द्वारा चंद्रमा को ग्रसने पर चांदनी लुप्त हो जाती है।
पदच्छेदः
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| क्षणमात्रसखीं | क्षण–मात्र–सखि (२.१) | which was a companion for just a moment |
| सुजातयोः | सुजात (६.२) | well-formed |
| स्तनयोः | स्तन (६.२) | of the two breasts |
| ताम् | तद् (२.१) | it (the garland) |
| अवलोक्य | अवलोक्य (अव√लोक्+ल्यप्) | having seen |
| विह्वला | विह्वल (१.१) | distressed |
| निमिमील | निमिमील (नि√मील् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | closed her eyes |
| नरोत्तमप्रिया | नर–उत्तम–प्रिया (१.१) | the beloved of the best of men (Aja) |
| हृतचन्द्रा | हृत–चन्द्र (१.१) | whose moon is seized |
| तमसा | तमस् (३.१) | by darkness (Rahu) |
| इव | इव | like |
| कौमुदी | कौमुदी (१.१) | moonlight |
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