अथवा मृदु वस्तु हिंसितुं
मृदुनैवारभते प्रजान्तकः ।
हिमसेकविपत्तिरत्र मे
नलिनी पूर्वनिदर्शनं मता ॥

अन्वयः AI अथवा प्रजान्तकः मृदु वस्तु हिंसितुम् मृदुना एव आरभते । अत्र हिम-सेक-विपत्तिः नलिनी मे पूर्व-निदर्शनम् मता ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) अथवेति॥ अथवा पक्षान्तरे। प्रजान्तकः कालो मृत्युः मृदु कोमलं वस्तु मृदुनैव वस्तुना हिंसितुं हन्तुमारभत उपक्रमते। अत्रार्थे हिमसेकेन तुषारनिष्यन्देन विपत्तिर्मृत्युर्यस्याः सा तथा नलिनी पद्मिनी मे पूर्वं प्रथमं निदर्शनमुदाहरणं मता, द्वितीयं निदर्शनं पुष्पमृत्युरिन्दुमतीति भावः ॥
Summary AI Or perhaps, the Destroyer of beings begins to harm a soft thing with a soft instrument. In this matter, the lotus plant destroyed by a shower of frost is considered by me a prior example.
सारांश AI अथवा मृत्यु कोमल वस्तु का विनाश कोमल वस्तु से ही करती है। पाले के गिरने से नष्ट होने वाली कमलिनी इस सत्य का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
पदच्छेदः AI
अथवाअथवा Or
मृदुमृदु (२.१) a soft
वस्तुवस्तु (२.१) thing
हिंसितुम्हिंसितुम् (√हिंस्+तुमुन्) to harm
मृदुनामृदु (३.१) with a soft thing
एवएव only
आरभतेआरभते (आ√रभ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) begins
प्रजान्तकःप्रजाअन्तक (१.१) the destroyer of beings
हिमसेकविपत्तिःहिमसेकविपत्ति (१.१) the destruction by a shower of frost
अत्रअत्र in this matter
मेअस्मद् (६.१) by me
नलिनीनलिनी (१.१) a lotus plant
पूर्वनिदर्शनम्पूर्वनिदर्शन (१.१) a prior example
मतामत (√मन्+क्त+टाप्, १.१) is considered
छन्दः वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
वा मृ दु स्तु हिं सि तुं
मृ दु नै वा ते प्र जा न्त कः
हि से वि त्ति त्र मे
लि नी पू र्व नि र्श नं ता
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