अन्वयः
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ते मुखे सुरत-श्रम-संभृतः स्वेद-लव-उद्गमः अपि ध्रियते । अथ च त्वम् आत्मना अस्तमिता । धिक् इमाम् देह-भृताम् असारताम् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सुरतेति॥ सुरतश्रमेण संभृतो जनितः स्वेदलवोद्गमोऽपि ते तव मुखे ध्रियते वर्तते। अथ च त्वमात्मना स्वरूपेणास्तं प्राप्ताः। अतः कारणाद्देहभृतां प्राणिनामिमां प्रत्यक्षामसारतामस्थिरतां धिक् ॥
Summary
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On your face, the appearance of sweat drops from the exertion of love-making is still visible. And yet, you yourself have vanished. Fie upon this transience of embodied beings!
सारांश
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तुम्हारे मुख पर परिश्रम से उपजी पसीने की बूंदें अभी भी विद्यमान हैं, किंतु तुम स्वयं शरीर त्याग चुकी हो। धिक्कार है प्राणियों की इस क्षणभंगुरता को।
पदच्छेदः
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| सुरतश्रमसंभृतः | सुरत–श्रम–संभृत (१.१) | produced by the exertion of love-making |
| मुखे | मुख (७.१) | on the face |
| ध्रियते | ध्रियते (√धृ भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is held |
| स्वेदलवोद्गमः | स्वेद–लव–उद्गम (१.१) | the appearance of drops of sweat |
| अपि | अपि | still |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| अथ | अथ | And yet |
| च | च | and |
| अस्तमिता | अस्तमित (अस्तम्√इ+क्त+टाप्, १.१) | have vanished |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| आत्मना | आत्मन् (३.१) | yourself |
| धिक् | धिक् | fie upon |
| इमाम् | इदम् (२.१) | this |
| देहभृताम् | देह–भृत् (६.३) | of embodied beings |
| असारताम् | असारता (२.१) | the transience |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | र | त | श्र | म | सं | भृ | तो | मु | खे | |
| ध्रि | य | ते | स्वे | द | ल | वो | द्ग | मो | ऽपि | ते |
| अ | थ | चा | स्त | मि | ता | त्व | मा | त्म | ना | |
| धि | गि | मां | दे | ह | भृ | ता | म | सा | र | ताम् |
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