अन्वयः
AI
करभ-ऊरु! मारुतः कुसुम-उत्सु-अचितान् वली-भृतः भृङ्ग-रुचः तव अलकान् चलयन् मे मनः त्वत्-उपावर्तन-शङ्कि करोति ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कुसुमेति॥ कुसुमैरुत्खचितानुत्कर्षेण रचितान् वलीभृतो भङ्गीयुक्तान्। कुटिलानित्यर्थः। भृङ्गरुचो नीलांस्तवालकांश्चलयन्कम्ययन् मारुतः हे करभोरु करभसदृशोरु!
मणिबन्धादाकनिष्ठं करस्य करभो बहिः इत्यमरः। मे मनस्त्वदुपावर्तनशङ्कि तव पुनरागमने शङ्कावत्करोति। त्वदुज्जीवने शङ्कां कारयतीत्यर्थः ॥
Summary
AI
O you with thighs like an elephant's trunk! The wind, moving your curly, bee-dark locks adorned with flowers, makes my mind apprehensive, as if you are about to return.
सारांश
AI
हे सुंदरी! वायु तुम्हारे भौंरों के समान काले बालों को हिला रही है, जिससे मेरे मन में तुम्हारे पुनः जीवित होने की व्यर्थ आशा जागृत हो रही है।
पदच्छेदः
AI
| कुसुमोत्स्वचितान् | कुसुम–उत्सु–अचित (२.३) | adorned with flowers |
| वलीभृतः | वली–भृत् (२.३) | curly |
| चलयन् | चलयत् (√चल्+णिच्+शतृ, १.१) | moving |
| भृङ्गरुचः | भृङ्ग–रुच् (२.३) | having the sheen of bees |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| अलकान् | अलक (२.३) | locks of hair |
| करभोरु | करभ–ऊरु (८.१) | O you with thighs like an elephant's trunk! |
| करोति | करोति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | makes |
| मारुतः | मारुत (१.१) | the wind |
| त्वदुपावर्तनशङ्कि | त्वत्–उपावर्तन–शङ्किन् (२.१) | apprehensive of your return |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| मनः | मनस् (२.१) | mind |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कु | सु | मो | त्स्व | चि | ता | न्व | ली | भृ | त | |
| श्च | ल | य | न्भृ | ङ्ग | रु | च | स्त | वा | ल | कान् |
| क | र | भो | रु | क | रो | ति | मा | रु | त | |
| स्त्व | दु | पा | व | र्त | न | श | ङ्कि | मे | म | नः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.