अन्वयः
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(त्वया) अन्य-भृतासु कलम् भाषितम्, कल-हंसीषु मद-अलसम् गतम्, पृषतीषु विलोलम् ईक्षितम्, पवन-आधूत-लतासु विभ्रमाः (निक्षिप्ताः) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कलमिति॥ त्रिदिवेति॥ युग्मम्। उभयोरेकान्वयः। अन्यभृतासु कोकिलासु कलं मधुरं भाषितं भाषणम्। कलहंसीषु विशिष्टहंसीषु मदालसं मन्थरं गतं गमनम्। पृषतीषु हरिणीषु विलोलमीक्षितं चञ्चला दृष्टिः। पवनेन वायुना धूतलतास्वीषत्कम्पितलतासु विभ्रमा विलासाः। इत्यमी पूर्वोक्ताः कलभाषणादयो गुणाः। एषु कोकिलादिस्थानेष्विति शेषः। त्रिदिवोत्सुकयापीह जीवन्त्येव स्वर्गं प्रति प्रस्थितयापि त्वया मामवेक्ष्य विरहासहं विचार्य सत्यं निहिताः। मत्प्राणधारणोपायतया स्थापिता इत्यर्थथः। तव विरहे गुरुव्यथमतिदुःखं मे हृदयं मनोऽवलम्बितुं स्थापयितुं न क्षमा न शक्ताः। ते तु तत्संगम एव सुखकारणः, नान्यथा। प्रत्युत प्राणानपहरन्तीति भावः ॥
Summary
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(It seems as if) you have bequeathed your sweet speech to the cuckoos, your graceful gait to the royal swans, your tremulous glances to the female deer, and your charming movements to the creepers shaken by the wind.
सारांश
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तुमने अपनी मधुर वाणी कोयलों में, मतवाली चाल हंसों में, चंचल दृष्टि हिरणियों में और विलास की चेष्टाएं लताओं में छोड़ दी हैं।
पदच्छेदः
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| कलम् | कल (२.१) | sweetly |
| अन्यभृतासु | अन्य–भृता (७.३) | in the cuckoos |
| भाषितम् | भाषित (√भाष्+क्त, १.१) | your speech |
| कलहंसीषु | कल–हंसी (७.३) | in the royal swans |
| मदालसम् | मद–अलस (२.१) | gracefully slow |
| गतम् | गत (√गम्+क्त, १.१) | your gait |
| पृषतीषु | पृषती (७.३) | in the female deer |
| विलोलम् | विलोल (२.१) | tremulously |
| ईक्षितम् | ईक्षित (√ईक्ष्+क्त, १.१) | your glance |
| पवनाधूतलतासु | पवन–आधूत–लता (७.३) | in the creepers shaken by the wind |
| विभ्रमाः | विभ्रम (वि√भ्रम्+घञ्, १.३) | your graceful charms |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | ल | म | न्य | भृ | ता | सु | भा | षि | तं | |
| क | ल | हं | सी | षु | म | दा | ल | सं | ग | तम् |
| पृ | ष | ती | षु | वि | लो | ल | मी | क्षि | तं | |
| प | व | ना | धू | त | ल | ता | सु | वि | भ्र | माः |
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