अन्वयः
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महा-भुजः सः (अजः) 'इयम् अचिर-उपनता मेदिनी सहसा उद्वेगम् व्रजेत्' इति (विचार्य) नव-पाणि-ग्रहणाम् वधूम् इव (ताम्) सदयम् बुभुजे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सदयमिति॥ सहाभुजः सोऽजोऽचिरोपनतां नवोपगतां मेदिनीं भुवम्। नवं पाणिग्रहणं विवाहो यस्यास्तां नवोढां वधूमिव। सहसा बलात्कारेण चेत्।
सहो बलं सहा मार्गः इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.२४७ ) । इयं मेदिनीर्वा। उद्वेगं भयं व्रजेदिति हेतोः। सदयं सकृपं बुभुजे भुक्तवान्। भुजोऽनवने (अष्टाध्यायी १.३.६६ ) इत्यात्मनेपदम् ॥
Summary
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The mighty-armed Aja ruled the recently acquired earth gently, like a newly-wed bride, thinking, "She might suddenly become distressed." He enjoyed his rule with compassion, ensuring the kingdom was not overwhelmed.
सारांश
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महाबली अज ने नवविवाहिता वधू के समान ही हाल ही में प्राप्त पृथ्वी का बड़े कोमलता से उपभोग किया, ताकि वह घबरा न जाए।
पदच्छेदः
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| सदयम् | सदय (२.१) | gently |
| बुभुजे | बुभुजे (√भुज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | ruled/enjoyed |
| महाभुजः | महत्–भुज (१.१) | the mighty-armed one |
| सहसा | सहसा | suddenly |
| उद्वेगम् | उद्वेग (२.१) | distress |
| इयम् | इदम् (१.१) | this one |
| व्रजेत् | व्रजेत् (√व्रज् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | might go to |
| इति | इति | thus (thinking) |
| अचिरोपनताम् | अचिर–उपनत (उप√नम्+क्त, २.१) | recently acquired |
| सः | तद् (१.१) | he |
| मेदिनीम् | मेदिनी (२.१) | the earth |
| नवपाणिग्रहणम् | नव–पाणिग्रहण (२.१) | newly-wed |
| वधूम् | वधू (२.१) | bride |
| इव | इव | like |
छन्दः
गीतिः
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | द | यं | बु | भु | जे | म | हा | भु | ||||
| जः | स | ह | सो | द्वे | ग | मि | यं | व्र | जे | दि | ति | |
| अ | चि | रो | प | न | तां | स | मे | दि | ||||
| नीं | न | व | पा | णि | ग्र | ह | र | णां | व | धू | मि | व |
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