प्रमदामनु संस्थितः शुचा
नृपतिः सन्निति वाच्यदर्शनात् ।
न चकार शरीरमग्निसा-
त्सह देव्या न तु जीविताशया ॥
प्रमदामनु संस्थितः शुचा
नृपतिः सन्निति वाच्यदर्शनात् ।
न चकार शरीरमग्निसा-
त्सह देव्या न तु जीविताशया ॥
नृपतिः सन्निति वाच्यदर्शनात् ।
न चकार शरीरमग्निसा-
त्सह देव्या न तु जीविताशया ॥
अन्वयः
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शुचा प्रमदाम् अनु संस्थितः सन् नृपतिः, इति वाच्यदर्शनात्, देव्या सह शरीरम् अग्निसात् न चकार, तु जीविताशया न ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
प्रमदामिति॥ नृपतिरजः सन्नपि विद्धानपि शुचा शोकेन प्रमदामनुप्रमदया सह संस्थितो मृत इति वाच्यदर्शनान्निन्दादर्शनाद्देव्येन्दुमत्या सह शरीरमग्निसादग्न्यधीनं न चकार।
तदधीनवचने (अष्टाध्यायी ५.४.५४ ) इति सातिप्रत्ययः। जीविताशया प्राणेच्छया तु नेति ॥
Summary
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"The king, though prepared to follow his beloved in death out of grief, did not consign his body to the flames along with the queen. This was due to the fear of public censure, not out of a desire to live."
सारांश
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राजा ने केवल लोकनिंदा के भय से स्वयं को अग्नि को समर्पित नहीं किया, न कि जीवित रहने की किसी इच्छा के कारण।
पदच्छेदः
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| प्रमदाम् | प्रमदा (२.१) | the beloved |
| अनु | अनु | after |
| संस्थितः | संस्थित (सम्√स्था+क्त, १.१) | ready to die |
| शुचा | शुच् (३.१) | with grief |
| नृपतिः | नृपति (१.१) | the king |
| सन् | सत् (√अस्+शतृ, १.१) | being |
| इति | इति | thus |
| वाच्यदर्शनात् | वाच्य–दर्शन (५.१) | from the fear of public censure |
| न | न | not |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | did |
| शरीरम् | शरीर (२.१) | his body |
| अग्निसात् | अग्नि (+साति) | to the fire |
| सह | सह | with |
| देव्या | देवी (३.१) | the queen |
| न | न | not |
| तु | तु | but |
| जीविताशया | जीवित–आशा (३.१) | out of a desire to live |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | म | दा | म | नु | सं | स्थि | तः | शु | चा | |
| नृ | प | तिः | स | न्नि | ति | वा | च्य | द | र्श | नात् |
| न | च | का | र | श | री | र | म | ग्नि | सा | |
| त्स | ह | दे | व्या | न | तु | जी | वि | ता | श | या |
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