अन्वयः
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अथ दशाहतः परे विदुषा तेन गुणशेषाम् भामिनीम् अपदिश्य महर्द्धयः विधयः पुरः एव उपवने समापिताः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति॥ अथ विदुषा शास्त्रज्ञेन तेनाजेन। गुणा एव शेषा रूपादयो यस्यास्तां गुणशेषां भामिनीमिन्दुमतीमपदिश्योद्दिश्य। दशानामह्रां समाहारो दशाहः।
तद्धितार्थ- (अष्टाध्यायी २.१.५१ ) इत्यादिना समासः। समाहारस्यैकत्वादेकवचनम्। राजाहःसखिभ्यष्टच् (अष्टाध्यायी ५.४.५१ ) इति टच्। रात्राह्राहाः पुंसि (अष्टाध्यायी २.४.२९ ) इति पुंवत्। ततस्तसिल्। तस्माद्दशाहतः पर ऊर्ध्वं कर्तव्या महर्द्धयो महासमृद्धयो विधयः क्रियाः पुरः पुर्या उपवन उद्यान एव समापिताः संपूर्णमनुष्ठिताः। दशाहतः इत्यत्र विप्रः शुद्ध्योद्दशाहेन द्वादशाहेन भूमिपः(५।८३) इति मनुवचनविरोधो नाशङ्कनीयः; तस्य निर्गुणक्षत्रियविषयत्वात्। गुणवत्क्षत्रियस्य तु दशाहेन शुद्धिमाह पराशरः-क्षत्रियस्तु दशाहेन स्वधर्मनिरतः शुचिःइति। सूच्यतेऽस्यापि गुणवत्त्वं विदुषा इत्यनेन ॥
Summary
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"Then, after ten days, the learned king, citing the lady who was now but a memory of virtues, completed the magnificent funeral rites in a garden just outside the city."
सारांश
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दस दिन बीतने पर राजा ने नगर के बाहरी उद्यान में अपनी प्रिय पत्नी के लिए समस्त गरिमामय अंत्येष्टि कर्म संपन्न किए।
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | Then |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| दशाहतः | दश–अहन् (+तसिल्) | after ten days |
| परे | पर (७.१) | after |
| गुणशेषाम् | गुण–शेषा (२.१) | who was remaining only in virtues |
| अपदिश्य | अपदिश्य (अप√दिश्+ल्यप्) | citing |
| भामिनीम् | भामिनी (२.१) | the lady |
| विदुषा | विद्वस् (३.१) | the learned one |
| विधयः | विधि (१.३) | the rites |
| महर्द्धयः | महा–ऋद्धि (१.३) | magnificent |
| पुरः | पुरस् | outside the city |
| एव | एव | just |
| उपवने | उपवन (७.१) | in a garden |
| समापिताः | समापित (सम्+णिच्√आप्+क्त, १.३) | were completed |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | ते | न | द | शा | ह | तः | प | रे | |
| गु | ण | शे | षा | म | प | दि | श्य | भा | मि | नीम् |
| वि | दु | षा | वि | ध | यो | म | ह | र्द्ध | यः | |
| पु | र | ए | वो | प | व | ने | स | मा | पि | ताः |
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