अन्वयः
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अथ आश्रमस्थितः सवनाय दीक्षितः गुरुः प्रणिधानात् तम् अभिषङ्गजडम् विजज्ञिवान्, इति शिष्येण किल अन्वबोधयत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति॥ अथ सवनाय यागाय दीक्षितो गुरुर्वसिष्ठ आश्रमे स्वकीयाश्रमे स्थितः सन्। तमजमभिषङ्गजडं दुःखमोहितं प्रणिधानाञ्चित्तैकाग्र्याद्विजज्ञिवाञ्ज्ञातवान्।
क्वसुश्च (अष्टाध्यायी ३.२.१०७ ) इति क्वसुप्रत्ययः। इति वक्ष्यमाणप्रकारेण शिष्येणान्वबोधयत्किल। बुधेर्ण्यन्ताण्णिचि लङ् ॥
Summary
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"Then, his guru (Vashistha), who was residing in the hermitage and consecrated for a sacrifice, came to know through his meditative power that Aja was stupefied by grief. He reportedly sent a message through a disciple."
सारांश
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यज्ञ में दीक्षित गुरु वशिष्ठ ने ध्यान के माध्यम से अज के शोक को जानकर अपने शिष्य के द्वारा उन्हें सांत्वना संदेश भेजा।
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | Then |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| सवनाय | सवन (४.१) | for a sacrifice |
| दीक्षितः | दीक्षित (१.१) | consecrated |
| प्रणिधानात् | प्रणिधान (५.१) | through meditation |
| गुरुः | गुरु (१.१) | the guru |
| आश्रमस्थितः | आश्रम–स्थित (१.१) | residing in the hermitage |
| अभिषङ्गजडम् | अभिषङ्ग–जड (२.१) | stupefied by grief |
| विजज्ञिवान् | विजज्ञिवस् (वि√ज्ञा+क्वसु, १.१) | came to know |
| इति | इति | thus |
| शिष्येण | शिष्य (३.१) | through a disciple |
| किल | किल | reportedly |
| अन्वबोधयत् | अन्वबोधयत् (अनु+णिच्√बुध् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | informed |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | तं | स | व | ना | य | दी | क्षि | तः | |
| प्र | णि | धा | ना | द्गु | रु | रा | श्र | म | स्थि | तः |
| अ | भि | ष | ङ्ग | ज | डं | वि | ज | ज्ञि | वा | |
| नि | ति | शि | ष्ये | ण | कि | ला | न्व | बो | ध | यत् |
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