अन्वयः
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सुवृत्त! विश्रुतसत्त्वसार! तस्य लघुसन्देशपदा सरस्वती मयि वर्तते । ताम् श्रृणु, च एनाम् हृदि उपधातुम् अर्हसि ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
मयीति॥ हे सुवृत्त सदाचार! संदिश्यत इति संदेशः संदेष्टव्यार्थः। तस्य पदानि वाचकानि लघूनि संक्षिप्तानि संदेशपदानि यस्यां सा लघुसंदेशपदा तस्य मुनेः सरस्वती वाक् मयि वर्तते। हे विश्रुतसत्त्वसार प्रख्यातधैर्यातिशय। तां सरस्वतीं शुणु। एनां वाचं हृद्युपधातुं धर्तुं चार्हसि ॥
Summary
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The disciple says: "O man of good conduct! O you of renowned inner strength! I bear his message, composed of a few words. Listen to it, and you should take it to heart."
सारांश
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हे पराक्रमी राजा! मुनि वशिष्ठ का यह संक्षिप्त किंतु सारगर्भित संदेश सुनो और इसे अपने हृदय में धारण करो।
पदच्छेदः
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| मयि | अस्मद् (७.१) | With me |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| सुवृत्त | सुवृत्त (८.१) | O man of good conduct |
| वर्तते | वर्तते (√वृत् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is |
| लघुसंदेशपदा | लघु–सन्देश–पदा (१.१) | composed of a short message |
| सरस्वती | सरस्वती (१.१) | speech |
| श्रृणु | श्रृणु (√श्रु कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | listen |
| विश्रुतसत्त्वसार | विश्रुत–सत्त्व–सार (८.१) | O you of renowned inner strength |
| ताम् | तद् (२.१) | to it |
| हृदि | हृद् (७.१) | in your heart |
| च | च | and |
| एनाम् | एनद् (२.१) | it |
| उपधातुम् | उपधातुम् (उप√धा+तुमुन्) | to place |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you should |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | यि | त | स्य | सु | वृ | त्त | व | र्त | ते | |
| ल | घु | सं | दे | श | प | दा | स | र | स्व | ती |
| श्रृ | णु | वि | श्रु | त | स | त्त्व | सा | र | तां | |
| हृ | दि | चै | ना | मु | प | धा | तु | म | र्ह | सि |
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