चरतः किल दुश्चरं तप-
स्तृणबिन्दोः परिशङ्कितः पुरा ।
प्रजिघाय समाधिभेदिनीं
हरिरस्मै हरिणीं सुराङ्गनाम् ॥
चरतः किल दुश्चरं तप-
स्तृणबिन्दोः परिशङ्कितः पुरा ।
प्रजिघाय समाधिभेदिनीं
हरिरस्मै हरिणीं सुराङ्गनाम् ॥
स्तृणबिन्दोः परिशङ्कितः पुरा ।
प्रजिघाय समाधिभेदिनीं
हरिरस्मै हरिणीं सुराङ्गनाम् ॥
अन्वयः
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पुरा दुश्चरम् तपः चरतः तृणबिन्दोः परिशङ्कितः हरिः किल अस्मै समाधिभेदिनीम् हरिणीम् सुराङ्गनाम् प्रजिघाय ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
चरत इति॥ पुरा किल दुश्चरं तीव्रं तपश्चरतस्तृणबिन्दोस्तृणबिन्दुनामकात्कस्माञ्चिदृषेः परिशङ्कितो भीतः। कर्तरि क्तः।
भीत्रार्थानां भयहेतुः (अष्टाध्यायी १.४.२५ ) इत्यपादानात्पञ्चमी। हरिरिन्द्रः समाधिभेदिनीं तपोविघातिनीं हरिणीं नाम सुराङ्गनामस्मै तृणबिन्दवे प्रजिघाय प्रेरितवान् ॥
Summary
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"In the past, Indra (Hari), becoming apprehensive of the sage Trinabindu who was performing severe penance, allegedly sent to him a celestial nymph named Harini, a breaker of meditation."
सारांश
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प्राचीन काल में राजा तृणबिंदु की कठिन तपस्या से सशंकित होकर इंद्र ने उनकी समाधि भंग करने के लिए हरिणी नामक अप्सरा भेजी थी।
पदच्छेदः
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| चरतः | चरत् (√चर्+शतृ, ६.१) | of the one performing |
| किल | किल | allegedly |
| दुश्चरम् | दुस्–चर (२.१) | difficult to perform |
| तपः | तपस् (२.१) | penance |
| तृणबिन्दोः | तृणबिन्दु (६.१) | of Trinabindu |
| परिशङ्कितः | परिशङ्कित (परि√शङ्क्+क्त, १.१) | having become apprehensive |
| पुरा | पुरा | in the past |
| प्रजिघाय | प्रजिघाय (प्र√हि कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | sent |
| समाधिभेदिनीम् | समाधि–भेदिनी (२.१) | a breaker of meditation |
| हरिः | हरि (१.१) | Indra |
| अस्मै | इदम् (४.१) | to him |
| हरिणीम् | हरिणी (२.१) | Harini |
| सुराङ्गनाम् | सुर–अङ्गना (२.१) | a celestial nymph |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| च | र | तः | कि | ल | दु | श्च | रं | त | प | |
| स्तृ | ण | बि | न्दोः | प | रि | श | ङ्कि | तः | पु | रा |
| प्र | जि | घा | य | स | मा | धि | भे | दि | नीं | |
| ह | रि | र | स्मै | ह | रि | णीं | सु | रा | ङ्ग | नाम् |
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