अन्वयः
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सा क्रथकैशिक-वंश-सम्भवा चिराय तव महिषी भूत्वा, विवशा (सती) दिवः च्युतम् शाप-निवृत्ति-कारणम् उपलब्धवती ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
क्रथेति॥ क्रथकैशिकानां राज्ञां वंशे संभवो यस्याः सा हरिणी तव भहिष्यभिषिक्ता स्त्री।
कृताभिषेका महिषी इत्यमरः (अमरकोशः २.६.५ ) । भूत्वा चिराय दिवः स्वर्गाञ्च्युतं पतितं शापनिवृत्तिकारणं सुरपुष्परूपलब्धवती विवशा। अभूदिति शेषः। मृतेत्यर्थः॥
Summary
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(Vasistha speaks to Aja) She, born in the lineage of Krathakaishika, became your queen for a long time. Being helpless due to the curse, she has now obtained the cause for the curse's end, which had fallen from heaven.
सारांश
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क्रथकैशिक वंश में उत्पन्न वह इंदुमती चिरकाल तक आपकी महिषी रहीं, और अब विवश होकर स्वर्ग से गिरे उस शाप-निवृत्ति के कारण को उन्होंने प्राप्त किया है।
पदच्छेदः
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| क्रथकैशिक-वंश-सम्भवा | क्रथकैशिक–वंश–सम्भवा (१.१) | born in the lineage of Krathakaishika |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| भूत्वा | भूत्वा (√भू+क्त्वा) | having become |
| महिषी | महिषी (१.१) | queen |
| चिराय | चिराय | for a long time |
| सा | तद् (१.१) | she |
| उपलब्धवती | उपलब्धवती (उप√लभ्+क्तवतु, १.१) | obtained |
| दिवः | दिव् (५.१) | from heaven |
| च्युतम् | च्युत (√च्यु+क्त, २.१) | fallen |
| विवशा | विवशा (१.१) | helpless |
| शाप-निवृत्ति-कारणम् | शाप–निवृत्ति–कारण (२.१) | the cause for the cessation of the curse |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्र | थ | कै | शि | क | वं | श | सं | भ | वा | |
| त | व | भू | त्वा | म | हि | षी | चि | रा | य | सा |
| उ | प | ल | ब्ध | व | ती | दि | व | श्च्यु | तं | |
| वि | व | शा | शा | प | नि | वृ | त्ति | का | र | णम् |
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