अन्वयः
AI
सः पुरस्कृत-मध्यम-क्रमः (सन्) पवमानः पृथिवी-रुहान् इव, नृपान् अनुद्धरन् (एव), न खरः न च भूयसा मृदुः (भूत्वा) नमयामास ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
नेति॥ स नृपो भूयसा बाहुल्येन खरस्तीक्ष्णो न। भूयसा मृदुरतिमृदुरपि न। कुंतु पुरस्कृतमध्यमक्रमः सन्, मध्यमपरिपाटीमवलम्ब्येत्यर्थः। पवमानो वायुः पृथिवीरुहांस्तरूनिव नृपाननुद्धरन्ननुत्पाटयन्नेव नमयामास। अत्र कामन्दकः-
मृदुश्चेदवमन्येत तीक्ष्णादुद्विजते जनः। तीक्ष्णश्चैव मृदुश्चैव प्रजानां स च संमतः ॥ इति ॥
Summary
AI
Adopting a middle course, he was neither harsh nor excessively soft. Like the wind that bends trees without uprooting them, he made other kings bow to him without deposing them from their thrones.
सारांश
AI
न अत्यधिक कठोर और न ही अत्यंत कोमल, मध्यम मार्ग अपनाते हुए अज ने वृक्षों को झुकाने वाली हवा की तरह राजाओं को बिना उखाड़े ही अपने वश में कर लिया।
पदच्छेदः
AI
| न | न | not |
| खरः | खर (१.१) | harsh |
| न | न | not |
| च | च | and |
| भूयसा | भूयस् (३.१) | excessively |
| मृदुः | मृदु (१.१) | soft |
| पवमानः | पवमान (√पू+शानच्, १.१) | wind |
| पृथिवीरुहान् | पृथिवी–रुह् (२.३) | trees |
| इव | इव | like |
| सः | तद् (१.१) | he |
| पुरस्कृतमध्यमक्रमः | पुरस्कृत (पुरस्√कृ+क्त)–मध्यम–क्रम (१.१) | who adopted a middle course |
| नमयामास | नमयामास (√नम् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | made to bow |
| नृपान् | नृप (२.३) | kings |
| अनुद्धरन् | न–उद्धरत् (उत्√हृ+शत्रृ, १.१) | without uprooting |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | ख | रो | न | च | भू | य | सा | मृ | दुः | |
| प | व | मा | नः | पृ | थि | वी | रु | हा | नि | व |
| स | पु | र | स्कृ | त | म | ध्य | म | क्र | मो | |
| न | म | या | मा | स | नृ | पा | न | नु | द्ध | रन् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.