अन्वयः
AI
अधिज्यशरासनः सः एकरथेन उदधिनेमिं मेदिनीम् अजयत् । तु अस्य गजवती जवतीव्रहया चमूः केवलं जयम् अघोषयत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अजयदिति॥ अधिज्यशरासनः स दशरथ उदधिनेमिं समुद्रवेष्टानां मेदिनीमेकरथेनाजयत्। स्वयमेकरथेनाजैषीदित्यर्थथः। गजवती गजयुक्ता। जवेन तीव्रा जवाधिका हया यस्यां सा चमूस्त्वस्य नृपस्य केवलं जयमघोषयदप्रथयत्। स्वयमेकंवीरस्य चमूरुपकरणमात्रमिति भावः॥
Summary
AI
He (Dasharatha), with his bow strung, conquered the ocean-rimmed earth with just a single chariot. His army, with its elephants and swift horses, merely announced his victory.
सारांश
AI
उन्होंने अकेले रथ पर सवार होकर समुद्र पर्यंत पृथ्वी को जीत लिया। उनकी विशाल सेना तो केवल उनकी विजय की घोषणा करने का एक माध्यम मात्र थी।
पदच्छेदः
AI
| अजयत् | अजयत् (√जि कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | conquered |
| एकरथेन | एक–रथ (३.१) | with a single chariot |
| सः | तद् (१.१) | he |
| मेदिनीम् | मेदिनी (२.१) | the earth |
| उदधिनेमिम् | उदधि–नेमि (२.१) | ocean-rimmed |
| अधिज्यशरासनः | अधिज्य–शरासन (१.१) | with his bow strung |
| जयम् | जय (२.१) | victory |
| अघोषयत् | अघोषयत् (√घुष् +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | announced |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| तु | तु | but |
| केवलम् | केवलम् | merely |
| गजवती | गजवत् (१.१) | possessing elephants |
| जवतीव्रहया | जव–तीव्र–हय (१.१) | with swift horses |
| चमूः | चमू (१.१) | army |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ज | य | दे | क | र | थे | न | स | मे | दि | नी |
| मु | द | धि | ने | मि | म | धि | ज्य | श | रा | स | नः |
| ज | य | म | घो | ष | य | द | स्य | तु | के | व | लं |
| ग | ज | व | ती | ज | व | ती | व्र | ह | या | च | मूः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.