अन्वयः
AI
क्रतुषु विसर्जितमौलिना भुजसमाहृतदिग्वसुना तेन (दशरथेन) तमसासरयूतटाः वितमसाः कनकयूपसमुच्छ्रयशोभिनः च कृताः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
क्रतुष्विति॥ क्रतुष्वश्वमेधेषु विसर्जितमौलिनाऽवरोपितकिरीटिन।
यावद्यज्ञमध्वर्युरेव राजा भवति इति राज्ञश्चिह्नत्यागविधानादित्यभिप्रायः। मौलिः किरीटे धम्मिल्ले इति विश्वः। भुजसमाहृतदिग्वसुना भुजार्जितदिगन्तसंपदा। अनेन क्षत्रियस्य विजितत्वमुक्तम्। नियमार्जितधनत्वं सद्विनियोगकारित्वं च सूच्यते। वितमसा तमोगुणरहितेन तेन दशरथेन। तमसा च सरयू नद्यौ। तयोस्तटः कनकयूपानां समुच्छ्रयेण समुन्नमनेन शोभिनः कृताः। कनकमयत्वं च यूपानां शोभार्थं विध्यभावात्। हेमयूपस्तु शोभिकः इति यादवः ॥
Summary
AI
By him (Dasharatha)—who set aside his crown during sacrifices and who had gathered wealth from all directions by his arms—the banks of the Tamasa and Sarayu rivers were made free from sin and splendid with the erection of golden sacrificial posts.
सारांश
AI
दिग्विजय से अर्जित धन के द्वारा दशरथ ने तमसा और सरयू के तटों पर अनेक भव्य यज्ञ किए, जहाँ स्वर्ण निर्मित यूप (स्तंभ) उनकी धार्मिक निष्ठा को दर्शा रहे थे।
पदच्छेदः
AI
| क्रतुषु | क्रतु (७.३) | in sacrifices |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| विसर्जितमौलिना | विसर्जित–मौलि (३.१) | by him who had set aside his crown |
| भुजसमाहृतदिग्वसुना | भुज–समाहृत–दिक्–वसु (३.१) | by him who had collected wealth from all directions by his arms |
| कृताः | कृत (√कृ+क्त, १.३) | were made |
| कनकयूपसमुच्छ्रयशोभिनः | कनक–यूप–समुच्छ्रय–शोभिन् (१.३) | shining with the erection of golden sacrificial posts |
| वितमसाः | वि–तमस् (१.३) | free from darkness/sin |
| तमसासरयूतटाः | तमसा–सरयू–तट (१.३) | the banks of the Tamasa and Sarayu rivers |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्र | तु | षु | ते | न | वि | स | र्जि | त | मौ | लि | ना |
| भु | ज | स | मा | हृ | त | दि | ग्व | सु | ना | कृ | ताः |
| क | न | क | यू | प | स | मु | च्छ्र | य | शो | भि | नो |
| वि | त | म | सा | त | म | सा | स | र | यू | त | टाः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.