अन्वयः
AI
सुवदनावदनासवसंभृतः तदनुवादिगुणः कुसुमोद्गमः मधुलोलुपैः आयतपङ्क्तिभिः मधुकरैः बकुलम् आकुलम् अकरोत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सुवदनेति॥ सुवदनावदनासवेन कान्तामुखमद्येन संभृतो जनितः। तत्तस्य दोहदमिति प्रसिद्धिः। तस्यासवस्यानुवादी सदृशो गुणो यस्य तदनुवादिगुणः कुसुमोद्गमः कर्ता मधुलोलुपैरायतपङ्क्तिभिर्दीर्घपङ्क्तिभिर्मधुकरैर्मधुपैः करणैः बकुलं बकुलवृक्षमाकुलमकरोत् ॥
Summary
AI
The blossoming of the Bakula flowers, which possessed a fragrance imitating the wine-like breath of a beautiful woman, caused the Bakula tree to be thronged by long rows of bees greedy for its nectar.
सारांश
AI
सुंदरियों के मुख की मदिरा से सिंचित और उनके गुणों को धारण करने वाले बकुल के पुष्पों पर लोभी भौरों की पंक्तियाँ उमड़ पड़ीं।
पदच्छेदः
AI
| सुवदनावदनासवसंभृतः | सुवदना–वदन–आसव–संभृत (१.१) | possessing the fragrance of wine from a beautiful woman's mouth |
| तदनुवादिगुणः | तत्–अनुवादिन्–गुण (१.१) | having a quality that imitates that |
| कुसुमोद्गमः | कुसुम–उद्गम (१.१) | the blossoming of flowers |
| मधुकरैः | मधुकर (३.३) | by bees |
| अकरोत् | अकरोत् (√कृ कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | made |
| मधुलोलुपैः | मधु–लोलुप (३.३) | greedy for nectar |
| बकुलम् | बकुल (२.१) | the Bakula tree |
| आकुलम् | आकुल (२.१) | crowded |
| आयतपङ्क्तिभिः | आयत–पङ्क्ति (३.३) | by long rows |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | व | द | ना | व | द | ना | स | व | सं | भृ | त |
| स्त | द | नु | वा | दि | गु | णः | कु | सु | मो | द्ग | मः |
| म | धु | क | रै | र | क | रो | न्म | धु | लो | लु | पै |
| र्ब | कु | ल | मा | कु | ल | मा | य | त | प | ङ्क्ति | भिः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.