अन्वयः
AI
मानं त्यजत, विग्रहैः अलम्। बत गतं चतुरं वयः पुनः न एति। इति इव परभृताभिः स्मरमते निवेदिते (सति), वधूजनः रमते स्म।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
त्यजतेति॥
बतइत्यामन्त्रणे। खेदानुकम्पासंतोषविस्मयामन्त्रणे बत इत्यमरः। बत अङ्गाना मानं कोपं त्यजत। तदुक्तम्-स्त्रीणामीर्ष्याकृतः कोपो मानोऽन्यासङ्गिनि प्रियेइति। विग्रहैर्विरोधैरलम्। विग्रहो न कार्य इत्यर्थः। गतमतीतं चतुरमुपभोगक्षमं वयो यौवनं पुनर्नैति नागच्छति। इत्येवंरूपे स्मरमते स्मराभिप्राये। नपुंसके भावे क्तः। परभृताभिः कोकिलाभिर्निवेदिते सतीव वधूजनो रमते स्म रेमे। कोकिलाकूजितोद्दीपितस्मरः स्त्रीजनः कामशासनभयादिवोच्छृङ्खलमखेलदित्यर्थः ॥
Summary
AI
As if the cuckoos were announcing the doctrine of the god of love, saying, "Give up your pride, enough with quarrels! Alas, charming youth, once gone, never returns," the young women began to enjoy themselves with their beloveds.
सारांश
AI
कोयल की कूक के बहाने कामदेव ने जैसे संदेश दिया कि क्रोध त्याग दो, बीता यौवन नहीं लौटता; यह सुनकर वधूजन रमण करने लगे।
पदच्छेदः
AI
| त्यजत | त्यजत (√त्यज् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. बहु.) | Give up |
| मानम् | मान (२.१) | pride |
| अलम् | अलम् | enough |
| बत | बत | alas |
| विग्रहैः | विग्रह (३.३) | with quarrels |
| न | न | not |
| पुनः | पुनर् | again |
| एति | एति (√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | comes |
| गतम् | गत (√गम्+क्त, १.१) | gone |
| चतुरम् | चतुर (१.१) | charming |
| वयः | वयस् (१.१) | youth |
| परभृताभिः | परभृता (३.३) | by the cuckoos |
| इति | इति | thus |
| इव | इव | as if |
| निवेदिते | निवेदित (नि√विद्+णिच्+क्त, ७.१) | having been announced |
| स्मरमते | स्मर–मत (७.१) | in the doctrine of Kama |
| रमते | रमते स्म (√रम् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | enjoyed |
| स्म | स्म | (past tense marker) |
| वधूजनः | वधूजन (१.१) | the young women |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्य | ज | त | मा | न | मा | लं | ब | त | वि | ग्र | है |
| र्न | पु | न | रे | ति | ग | तं | च | तु | रं | व | यः |
| प | र | भृ | ता | भि | रि | ती | व | नि | वे | दि | ते |
| स्म | र | म | ते | र | म | ते | स्म | व | धू | ज | नः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.