अन्वयः
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तनुलता-विनिवेशित-विग्रहाः भ्रमर-संक्रमित-ईक्षण-वृत्तयः वनदेवताः अध्वनि सुनयनम् नय-नन्दित-कोसलम् तम् ददृशुः।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तन्विति॥ तनुषु लतासु विनिवेशितविग्रहाः संक्रमितदेहाः। भ्रमरेषु संक्रमिता ईक्षणवृत्तयो दृग्व्यापारा यासां ता वनदेवताः सुनयनं सुलोचनं नयेन नीत्या नन्दितास्तोषिताः कोसला येन तं दशरथमध्वनि ददृशुः। प्रसन्नपावनतया तं देवता अपि गूढवृत्त्या ददृशुरित्यर्थः ॥
Summary
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The forest deities, who had hidden their forms within slender creepers and whose glances darted about like bees, saw him on the path—the handsome one who had delighted the people of Kosala with his just policies.
सारांश
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वनदेवियों ने लताओं के पीछे छिपकर चंचल भोरों के बहाने राजा दशरथ को बड़े कौतूहल और आनंद से देखा।
पदच्छेदः
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| तनुलताविनिवेशितविग्रहाः | तनुलता–विनिवेशित–विग्रहा (१.३) | who had placed their bodies in the slender creepers |
| भ्रमरसंक्रमितेक्षणवृत्तयः | भ्रमर–संक्रमित–ईक्षण–वृत्ति (१.३) | whose glances moved like bees |
| ददृशुः | ददृशुः (√दृश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | saw |
| अध्वनि | अध्वन् (७.१) | on the path |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| वनदेवताः | वनदेवता (१.३) | the forest deities |
| सुनयनम् | सु–नयन (२.१) | the handsome one |
| नयनन्दितकोसलम् | नय–नन्दित–कोसल (२.१) | who delighted the Kosalas by his policy |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | नु | ल | ता | वि | नि | वे | शि | त | वि | ग्र | हा |
| भ्र | म | र | सं | क्र | मि | ते | क्ष | ण | वृ | त्त | यः |
| द | दृ | शु | र | ध्व | नि | तं | व | न | दे | व | ताः |
| सु | न | य | नं | न | य | न | न्दि | त | को | स | लम् |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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